अधिकमास 2026: कब शुरू होगा और क्यों इस बार 60 दिन का होगा? पूरी जानकारी
अधिकमास 2026: कब शुरू होगा और क्यों इस बार 60 दिन का होगा? पूरी जानकारी
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर तीसरे साल आने वाला अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) अगले साल 2026 में दो बार आएगा और दूसरा अधिकमास असामान्य रूप से 60 दिन का होगा! यह दुर्लभ संयोग 60 साल बाद बन रहा है, जिसे ‘द्वि-अधिकमास वर्ष’ कहते हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, ऐसा तब होता है जब एक चंद्र वर्ष में दो अधिकमास पड़ते हैं और दूसरा मलमास सूर्य संक्रांति से पहले-बाद में फैल जाता है।
अधिकमास कब-कब और कितने दिन का?
पहला अधिकमास (सामान्य): 17 मई 2026 से 15 जून 2026 तक → 30 दिन
(यह आषाढ़ से पहले आएगा)
दूसरा अधिकमास (दुर्लभ 60 दिन वाला):
2 दिसंबर 2026 से 30 जनवरी 2027 तक → पूरे 60 दिन!
क्यों पड़ेगा 60 दिन का अधिकमास?
हिंदू पंचांग चंद्रमा पर आधारित है, जबकि सौर वर्ष 365 दिन का होता है। चंद्र वर्ष में 354 दिन ही होते हैं, इसलिए हर 32-33 महीने में एक अतिरिक्त मास (अधिकमास) जोड़ा जाता है ताकि त्योहार सही ऋतु में आएं।
2026 में दूसरा अधिकमास इसलिए 60 दिन का हो रहा है क्योंकि:
यह मास 2 दिसंबर 2026 को मंगलवार (मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष) से शुरू होगा।
अगली सूर्य संक्रांति (मकर संक्रांति) 14 जनवरी 2027 को आएगी।
अधिकमास तभी खत्म होता है जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में जाए।
लेकिन इस बार चंद्रमा की गति के कारण दूसरा अमांत महीना भी उसी राशि में पूरा हो जाएगा, इसलिए मास दोगुना (60 दिन) लंबा खिंच जाएगा।
पिछली बार ऐसा 1966 में हुआ था, अगला 2085 में होगा।
क्या करें, क्या न करें?
अधिकमास को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। पुरुषोत्तम मास में पूजा-पाठ, दान, जप, व्रत का फल हजार गुना मिलता है।
भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की विशेष पूजा की जाती है।
विवाह, मुंडन, गृह-प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं।
इस बार 60 दिन होने से श्राद्ध, पितृ-कार्य भी लंबे समय तक प्रभावित रहेंगे।
ज्योतिषी पंडित दीपक पांडेय कहते हैं, “60 दिन का अधिकमास जीवन में एक बार मिलने वाला अवसर है। इसे ‘महा-पुरुषोत्तम मास’ कहें तो अतिशयोक्ति नहीं। जो साधना करेगा, उसका भाग्य चमक जाएगा।”
तो डायरी में नोट कर लीजिए:
2 दिसंबर 2026 से 30 जनवरी 2027 तक – 60 दिन का स्वर्णिम अधिकमास!
