राजनीति

‘वंदे मातरम को चिरंजीव बनाने का संकल्प लें’: राज्यसभा में अमित शाह का भावुक आह्वान, कांग्रेस पर साधा निशाना

‘वंदे मातरम को चिरंजीव बनाने का संकल्प लें’: राज्यसभा में अमित शाह का भावुक आह्वान, कांग्रेस पर साधा निशाना

नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर राज्यसभा में बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय गीत को ‘अमर रचना’ बताते हुए सदन से चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा, “वंदे मातरम को चिरंजीव बनाने के लिए सदन चर्चा करे।” शाह ने इसे ‘भारत के पुनर्जन्म का मंत्र’ करार दिया और स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका को रेखांकित किया। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1875 में रचित इस गीत को ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ की नींव बताया, जो देश को एकजुट करने वाली शक्ति है।

राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने बहस शुरू करने से पहले सदन को संबोधित करते हुए कहा, “वंदे मातरम एक प्रतिज्ञा है – हमारी पहचान, एकता और सामूहिक भाग्य की।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यह गीत मातृभूमि के प्रति प्रेम का प्रतीक है, जो स्वतंत्रता संग्राम को प्रेरित करता रहा। शाह ने बहस को विपक्ष के आरोपों से जोड़ने की कोशिशों को खारिज करते हुए कहा, “कुछ लोग इसे पश्चिम बंगाल चुनावों से जोड़कर इसकी महत्ता घटाना चाहते हैं, लेकिन वंदे मातरम कभी बंगाल तक सीमित नहीं था।” उन्होंने प्रियंका गांधी के लोकसभा में दिए बयान का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि यह चर्चा चुनावी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।

शाह ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी के इमरजेंसी काल में ‘वंदे मातरम’ बोलने वालों को जेल में डाला गया और अखबारों पर सेंसरशिप लगाई गई। जवाहरलाल नेहरू ने 50 वर्ष पूरे होने पर इसे दो भागों में विभाजित कर दिया, जबकि 100 वर्ष पर कोई उत्सव नहीं हुआ क्योंकि विपक्षी नेता गिरफ्तार थे। शाह ने आरोप लगाया, “कांग्रेस की तुष्टिकरण राजनीति ने वंदे मातरम को ‘तुकड़े-तुकड़े’ किया, जिससे देश का विभाजन हुआ। यदि ऐसा न हुआ होता, तो भारत अखंड रहता।” उन्होंने महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों का जिक्र किया, जो इस गीत से प्रेरित होकर आंदोलन चलाते थे।

गृह मंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में यह गीत देश को जगाने वाला मंत्र था, जो अब ‘अमृत काल’ में विकसित भारत के निर्माण का नारा बनेगा। उन्होंने जोर दिया, “आजादी की लड़ाई में वंदे मातरम ने देश को आजाद कराया, 2047 तक यह विकसित भारत बनाने का संकल्प देगा।” शाह ने सैनिकों और पुलिसकर्मियों का उदाहरण दिया, जो अंतिम सांस तक इस गीत का जाप करते हैं। उन्होंने सदन से अपील की कि आने वाली पीढ़ियां इसकी महत्ता समझें, और सरकार ने वर्ष भर 150वीं वर्षगांठ मनाने का फैसला किया है।

लोकसभा में सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहस शुरू की थी, जहां राजनाथ सिंह ने समापन किया। राज्यसभा में 10 घंटे की बहस बुधवार तक चलेगी। विपक्ष ने इसे राजनीतिकरण का आरोप लगाया, लेकिन शाह ने कहा, “हम किसी चर्चा से भागते नहीं, हर मुद्दे पर तैयार हैं।” यह बहस राष्ट्रीय गीत की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का प्रयास है, जो बंकिम चंद्र के ‘आनंदमठ’ उपन्यास से निकला और रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा संगीतबद्ध हुआ। क्या यह चर्चा देश को एकजुट करेगी? सियासी बहस के बीच राष्ट्रीय भावना का संदेश साफ है.

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