यूपी SIR ट्रेंड: BJP की चिंता वाजिब या अतिरंजित? वोट शिफ्ट का डर, लेकिन प्रभाव सीमित
यूपी SIR ट्रेंड: BJP की चिंता वाजिब या अतिरंजित? वोट शिफ्ट का डर, लेकिन प्रभाव सीमित
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) अभियान ने राजनीतिक हलचल मचा रखी है। मतदाता सूचियों का यह विशेष गहन पुनरीक्षण, जो 25 नवंबर से शुरू होकर 11 दिसंबर तक चलेगा, BJP नेताओं के लिए सिरदर्द बन गया है। कारण? शहरी क्षेत्रों से मतदाताओं का ‘वोट शिफ्ट’ – जहां प्रवासी मजदूर अपने मूल ग्रामीण पते पर नाम ट्रांसफर करवा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, BJP को डर है कि इससे उनके कोर शहरी वोटबैंक (जो 2022 विधानसभा और 2024 लोकसभा में मजबूत था) कमजोर पड़ सकता है। लेकिन सवाल उठता है – क्या यह चिंता वाजिब है, या महज सियासी हवा?
SIR का पहला चरण पूरा होने के बाद मीडिया में खबरें आईं कि लखनऊ, कानपुर, आगरा जैसे शहरी जिलों में 10-12% मतदाता गांवों की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने BJP नेताओं के हवाले से बताया कि COVID के बाद लौटे मजदूर अब स्थायी पते अपडेट करवा रहे हैं, जिससे शहरी बूथों पर वोटर गिरावट आ रही है। आगरा में अमर उजाला की रिपोर्ट कहती है कि लोकसभा चुनाव के ‘400 पार’ नारे के बाद BJP का वोटबैंक ‘निश्चिंत’ हो गया था, और अब SIR से खुद के वोट कटने का खतरा मंडरा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल की मीटिंग्स में आंकड़ों के साथ नेताओं को लताड़ा – मुरादाबाद, अलीगढ़ जैसे जिलों में बूथ-लेवल पर BLA (बूथ लेवल एजेंट) की उदासीनता पर सवाल उठाए। रिपोर्ट के अनुसार, योगी ने विधायकों से ज्यादा ‘होमवर्क’ करके खामियां गिनाईं, जहां कई बूथों पर SIR कवरेज 50% से कम है।
RSS की नाराजगी ने आग में घी डाला। दिसंबर की शुरुआत में लखनऊ में RSS-BJP समन्वय बैठक में संघ नेताओं ने साफ कहा कि सांसद-विधायक SIR में ‘गायब’ हैं। इसके बाद BJP ने डेढ़ लाख कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारा, और योगी, केशव मौर्य, बृजेश पाठक ने 25-25 जिलों की कमान संभाली। सूत्र बताते हैं कि RSS ने जनप्रतिनिधियों को ‘जागरूकता’ के लिए फटकार लगाई, क्योंकि SIR से वोटर लिस्ट ‘साफ’ हो रही है, जो 2027 विधानसभा चुनावों के लिए क्रूसियल है।
विपक्ष ने इसे मौका बना लिया। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने बताया कि SIR ‘वोट कटाई’ का हथियार है – नोएडा में BJP ने IT कंपनियों को हायर कर मतदाता डेटा हेरफेर करवाया। अखिलेश ने सवाल किया, “यूपी में कोई तत्काल चुनाव नहीं, फिर जल्दबाजी क्यों? यह नॉर्थ कोरिया मॉडल है।” बलिया में निषाद पार्टी के संजय निषाद ने 20 हजार वोट ‘चोरी’ का दावा किया। बंगाल की तरह, यहां भी BJP पर ‘घुसपैठिए’ प्रचार का आरोप है।
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि BJP की चिंता ‘आंशिक रूप से वाजिब’ है, पर अतिरंजित। आजतक ओपिनियन में कहा गया कि शिफ्ट का पैमाना कुल मतदाता सूची (करीब 15 करोड़) पर न्यूनतम है – महज 10-12% शहरी प्रभावित, और ग्रामीण इलाकों में BJP का वोटबैंक मजबूत। बृजभूषण शरण सिंह जैसे नेता कहते हैं, “SIR को हिंदू-मुस्लिम न बनाएं, इसे राजनीतिक चश्मे से न देखें।” 2022 में भी सपा ने वोट कटाई का आरोप लगाया था, लेकिन BJP ने 255 सीटें जीतीं। SIR से लिस्ट साफ होना लोकतंत्र के लिए अच्छा है, लेकिन अगर हेरफेर साबित हुआ तो 2027 में उलटा असर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, BJP की सतर्कता सियासी रणनीति है, लेकिन वास्तविक खतरा कम। क्या यह ट्रेंड उलटेगा? फॉर्म भरने की आखिरी तारीख नजदीक है।
