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गाजा पुनर्निर्माण पर कतर का सख्त रुख: ‘हम चेक नहीं साइन करेंगे, इजरायल खुद जिम्मेदार बने’

गाजा पुनर्निर्माण पर कतर का सख्त रुख: ‘हम चेक नहीं साइन करेंगे, इजरायल खुद जिम्मेदार बने’

मध्य पूर्व के संवेदनशील संकट के बीच कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण को लेकर इजरायल पर सीधी चोट की है। दोहा फोरम के दूसरे दिन अमेरिकी पत्रकार टकर कार्लसन के साथ इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “हम चेक नहीं साइन करेंगे। इजरायल ने जो तबाही मचाई है, उसके लिए हम पैसे नहीं देंगे।” यह बयान गाजा में युद्धविराम की पहली अवस्था के समाप्त होने के ठीक बाद आया है, जब पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी पर वैश्विक बहस तेज हो रही है।

अल थानी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कतर फिलिस्तीनियों का साथ नहीं छोड़ेगा, लेकिन मानवीय सहायता तक सीमित रहेगा। “हम उनकी तकलीफ कम करने के लिए जो कर सकेंगे, करेंगे, लेकिन दूसरों द्वारा नष्ट की गई चीजों को दोबारा बनाने का खर्च हम नहीं उठाएंगे,” उन्होंने जोर देकर कहा। उन्होंने यूक्रेन का उदाहरण देते हुए दोहरा मापदंड उजागर किया: “यूक्रेन में रूस को सब कुछ चुकाना पड़ रहा है, लेकिन गाजा में क्षेत्रीय देशों से ही पैसे मांगे जा रहे हैं। यह अन्याय है।” संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक, गाजा का पुनर्निर्माण 70 अरब डॉलर का होगा, जहां 75 प्रतिशत इमारतें ध्वस्त हो चुकी हैं।

कतर के इस रुख से इजरायल पर दबाव बढ़ गया है। अल थानी ने हामास को फंडिंग के आरोपों को सिरे से खारिज किया, कहा कि सभी सहायता पारदर्शी तरीके से गाजा के लोगों तक पहुंची और इजरायल व अमेरिका दोनों इसके साक्षी हैं। “इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्रियों – नेतन्याहू, बेनेट, लैपिड – और खुफिया एजेंसियों ने खुद इसकी मंजूरी दी थी,” उन्होंने याद दिलाया। कतर ने 13 साल पहले अमेरिका के अनुरोध पर हामास के साथ संपर्क शुरू किया था, जो अब युद्धविराम और बंधकों की रिहाई में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

गाजा में दो साल के संघर्ष ने 70,000 से अधिक फिलिस्तीनियों की जान ली है, ज्यादातर महिलाएं और बच्चे। युद्धविराम 10 अक्टूबर को तुर्की, मिस्र और कतर की मध्यस्थता से लागू हुआ, लेकिन अल थानी ने चेतावनी दी कि इजरायली सेना की मौजूदगी और उल्लंघन से संघर्ष फिर भड़क सकता है। “यह सच्चा युद्धविराम नहीं, सिर्फ विराम है। पूर्ण वापसी और स्थिरता के बिना शांति संभव नहीं,” उन्होंने कहा। फिलिस्तीनियों को जबरन विस्थापित करने के विचार को भी उन्होंने खारिज किया, कहा कि यह उनका अधिकार है कि वे अपनी जमीन पर रहें।

अन्य खाड़ी देश जैसे यूएई और सऊदी अरब ने भी पुनर्निर्माण के लिए फिलिस्तीनी राज्य की राह सुनिश्चित करने की शर्त रखी है, जिसे इजरायल अस्वीकार करता है। अब सवाल यह है कि क्या अमेरिका के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय निकाय गाजा की सैरबंदी की निगरानी करेगा? कतर के बयान ने वैश्विक समुदाय को इजरायल पर जवाबदेही का दबाव बनाने का आह्वान किया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बिना राजनीतिक समाधान के – जैसे दो-राज्य समाधान – यह संकट और गहरा सकता है। कतर का यह दो-टूक बयान न केवल क्षेत्रीय गठबंधनों को प्रभावित करेगा, बल्कि फिलिस्तीन मुद्दे को नई दिशा भी दे सकता है।

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