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भारत-इजरायल रक्षा साझेदारी: अडानी के साथ PLR सिस्टम्स जल्द देगी 40,000 LMG और 1.7 लाख कार्बाइन

भारत-इजरायल रक्षा साझेदारी: अडानी के साथ PLR सिस्टम्स जल्द देगी 40,000 LMG और 1.7 लाख कार्बाइन

भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए इजरायली हथियार निर्माता कंपनी इजरायल वेपन इंडस्ट्रीज (IWI) ने अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के साथ संयुक्त उद्यम PLR सिस्टम्स के माध्यम से अगले साल की शुरुआत में भारतीय सेना को 40,000 नेगेव 7.62X51 एमएम लाइट मशीन गन (LMG) की पहली खेप सप्लाई करने की घोषणा की है। यह डील न केवल सेना की आधुनिकीकरण प्रक्रिया को गति देगी, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि ये हथियार मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित अडानी की फैसिलिटी में सह-उत्पादित हो रहे हैं।

IWI के सीईओ शूकी श्वार्ट्ज ने हाल ही में एक इंटरव्यू में पुष्टि की कि यह अनुबंध पिछले साल साइन किया गया था और सभी परीक्षण तथा सरकारी मंजूरी पूरी हो चुकी है। “LMG की सप्लाई पांच वर्षों के लिए है, लेकिन हम इसे तेजी से पूरा कर सकते हैं। पहली खेप जनवरी-फरवरी 2026 में पहुंच जाएगी,” श्वार्ट्ज ने कहा। नेगेव LMG अपनी हल्की वजन, उच्च सटीकता और विश्वसनीयता के लिए जानी जाती है, जो भारतीय सैनिकों को सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर फायरिंग क्षमता प्रदान करेगी। PLR सिस्टम्स, जिसमें IWI की 49% हिस्सेदारी है, इस उत्पादन का नेतृत्व कर रही है, जबकि अडानी ग्रुप 51% शेयरहोल्डर के रूप में स्थानीय विनिर्माण को सुनिश्चित कर रहा है।

इसके अलावा, PLR सिस्टम्स एक और महत्वपूर्ण अनुबंध के अंतिम चरण में है, जिसमें 4.25 लाख क्लोज क्वार्टर्स बैटल (CQB) कार्बाइन की आपूर्ति शामिल है। इसमें से 60% भारत फोर्ज द्वारा और शेष 40% (लगभग 1.70 लाख यूनिट) PLR द्वारा प्रदान की जाएंगी। यह अनुबंध वर्ष के अंत या अगले साल की शुरुआत में फाइनल हो सकता है। श्वार्ट्ज ने बताया कि अडानी के साथ साझेदारी से भारत में हल्के हथियारों का उत्पादन बढ़ेगा, जिसमें पिस्टल, राइफल और मशीन गन शामिल हैं। साथ ही, दोनों देश अरबेल सिस्टम पर चर्चा कर रहे हैं, जो AI-आधारित कंप्यूटरीकृत हथियार है। यह तकनीक सैनिकों को लक्ष्य पर तुरंत सटीक हमला करने में मदद करेगी और सह-उत्पादन के माध्यम से भारत में एकीकृत होगी।

यह सौदा भारत-इजरायल रक्षा संबंधों की मजबूती को दर्शाता है। 2018 से अडानी और IWI का JV चल रहा है, जो ग्वालियर में तavor, X95 और UZI जैसे हथियार बना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि रोजगार सृजन और तकनीकी हस्तांतरण भी होगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत कई एजेंसियों के साथ PLR अन्य छोटे हथियारों की आपूर्ति पर भी काम कर रही है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में कहा था कि ऐसी साझेदारियां आत्मनिर्भर भारत को साकार करेंगी। हालांकि, विपक्ष ने सवाल उठाए हैं कि क्या ये डीलें पारदर्शी हैं, लेकिन सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए समर्थन दिया है। कुल मिलाकर, यह समझौता भारतीय सेना को आधुनिक हथियारों से लैस करेगा, जो सीमा सुरक्षा और आंतरिक शांति के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

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