उत्तराखंड

उत्तराखंड पेपर लीक केस में नया ट्विस्ट: प्रोफेसर सुमन की जमानत याचिका CBI कोर्ट ने खारिज की, बेरोजगार संघ के बॉबी पंवार पर भी शिकंजा

उत्तराखंड पेपर लीक केस में नया ट्विस्ट: प्रोफेसर सुमन की जमानत याचिका CBI कोर्ट ने खारिज की, बेरोजगार संघ के बॉबी पंवार पर भी शिकंजा

देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तर की भर्ती परीक्षा में पेपर लीक मामले ने नया मोड़ ले लिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 28 नवंबर 2025 को असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन चौहान को गिरफ्तार किया, और अब उनकी जमानत याचिका को विशेष CBI कोर्ट ने खारिज कर दिया है। शुरुआती जांच में सुमन को ‘इनफॉर्मर’ बताकर छोड़ दिया गया था, लेकिन CBI की गहन जांच में उनकी भूमिका संदिग्ध साबित हुई। कोर्ट ने कहा कि सबूतों से साफ है कि सुमन ने परीक्षा के दौरान प्रश्नों को हल कर उत्तर उम्मीदवार तक पहुंचाए, जो साजिश का हिस्सा था।

मामला 25 सितंबर 2025 को हरिद्वार के एक परीक्षा केंद्र से शुरू हुआ, जब उम्मीदवार मोहम्मद खालिद ने स्मगल्ड iPhone से प्रश्न पत्र के तीन पेजों की फोटो खींचीं। खालिद ने इन्हें व्हाट्सएप पर अपनी बहन साबिया को भेजा, जिसने आगे प्रोफेसर सुमन चौहान को फॉरवर्ड किया। सुमन, जो टिहरी गढ़वाल के शहीद श्रीमती हंसा धनाई राजकीय महाविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, ने तुरंत कई प्रश्न हल कर उत्तर वापस भेजे। यह चेन रीयल-टाइम में चली, और उत्तर खालिद तक पहुंचे। CBI ने व्हाट्सएप चैट्स, टाइम-स्टैंप्ड फोटोज और कॉल रिकॉर्ड्स से यह साबित किया। खालिद की दूसरी बहन हिना भी इसमें शामिल थी। तीनों भाई-बहनों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था।

बेरोजगार संघ के पूर्व अध्यक्ष बॉबी पंवार ने ही सोशल मीडिया पर लीक पेज शेयर कर हंगामा खड़ा किया था, जिससे एक हफ्ते तक विरोध प्रदर्शन चले। पंवार ने सुमन को ‘इनफॉर्मर’ बताकर उनका बचाव किया, लेकिन CBI को शक है कि सुमन ने पेज पंवार को ही भेजे थे। एजेंसी ने 30 नवंबर को पंवार को समन भेजा है, और उनकी भूमिका की जांच इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से होगी। क्या पंवार और सुमन की पुरानी पहचान थी? यह सवाल CBI के केंद्र में है। पंवार ने दावा किया कि उन्होंने लीक उजागर किया, लेकिन CBI इसे ‘डबल गेम’ मान रही है।

उत्तराखंड सरकार ने प्रदर्शनों के दबाव में 26 अक्टूबर को CBI जांच सौंपी। UKSSSC ने परीक्षा रद्द कर 416 पदों के लिए तीन महीने में पुनः परीक्षा की घोषणा की। जस्टिस (रिटायर्ड) यूसी ध्यानी की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग भी गठित किया गया। CBI का कहना है कि यह गिरफ्तारी लीक नेटवर्क को तोड़ने का बड़ा कदम है, और और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। सुमन को 29 नवंबर को देहरादून CBI कोर्ट में पेश किया गया, जहां जमानत खारिज होने के बाद रिमांड बढ़ा दी गई।

यह मामला उत्तराखंड में भर्ती घोटालों की कड़ी को उजागर कर रहा है, जहां बेरोजगार युवाओं का गुस्सा सड़कों पर उतर आया। जानकारों का मानना है कि CBI की जांच से बड़े नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल, सुमन जेल में हैं, और पंवार की पूछताछ से नया खुलासा हो सकता है। युवा संगठनों ने सख्त सजा की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी साजिशें न हों।

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