नीरव मोदी प्रत्यर्पण: CBI-ED की संयुक्त टीम 14 दिसंबर को लंदन रवाना, यातना के दावों को तोड़ने को तैयार
नीरव मोदी प्रत्यर्पण: CBI-ED की संयुक्त टीम 14 दिसंबर को लंदन रवाना, यातना के दावों को तोड़ने को तैयार
नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के मुख्य आरोपी भगोड़े हीरे व्यापारी नीरव मोदी को भारत लाने की कवायद तेज हो गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की संयुक्त टीम 14 दिसंबर को लंदन रवाना हो रही है। यह टीम ब्रिटिश क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) के साथ मिलकर नीरव मोदी के प्रत्यर्पण अपील की पहली सुनवाई में भारत का पक्ष रखेगी। नीरव के यातना के दावों को ‘छलपूर्ण’ बताते हुए टीम सबूत पेश करेगी और अपील को खारिज कराने की कोशिश करेगी।
सूत्रों के अनुसार, नीरव मोदी ने अप्रैल 2021 में यूके होम सेक्रेटरी प्रीति पटेल द्वारा दिए गए प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की है। वह दावा कर रहा है कि भारत लौटने पर उसे यातना का सामना करना पड़ेगा। इससे पहले उसके 10 बेल आवेदन खारिज हो चुके हैं। भारतीय सरकार ने पहले ही लंदन को आश्वासन पत्र भेजा है कि प्रत्यर्पण के बाद नीरव को केवल मुकदमे का सामना करना पड़ेगा, कोई नई पूछताछ या हिरासत नहीं होगी। CBI अधिकारी ने कहा, “टीम CPS को सबूत देकर नीरव के दावों को झुठलाएगी। वह फर्जी अपीलें दाखिल कर प्रत्यर्पण टालने की कोशिश कर रहा है।”
नीरव मोदी 2018 के 14,000 करोड़ रुपये के PNB घोटाले का मास्टरमाइंड है। उस पर धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ के आरोप हैं। मार्च 2019 से वह लंदन की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद है। यूके कोर्ट ने प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी, लेकिन नीरव ने अपील कर इसे फिर खोलने की मांग की। अक्टूबर 2025 में कोर्ट में पेशी के दौरान उसने ‘सनसनीखेज खुलासे’ का दावा किया था, लेकिन कोई सबूत नहीं दिया। उसके भाई नीलम मोदी को जुलाई 2025 में अमेरिका में गिरफ्तार किया गया था।
भारतीय एजेंसियों ने नीरव के खिलाफ तीन मुकदमे दर्ज किए हैं – CBI का PNB फ्रॉड केस, ED का मनी लॉन्ड्रिंग केस और साक्ष्य छेड़छाड़ का तीसरा केस। ED ने उसके नाम पर 1,052 करोड़ की संपत्ति जब्त कर बैंकों को लौटा दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिसंबर 2024 में संसद में इसकी जानकारी दी थी। प्रत्यर्पण के बाद मुकदमे तेज करने से घोटाले की रकम वसूलने में मदद मिलेगी।
जानकारों का कहना है कि यह सुनवाई निर्णायक साबित हो सकती है। अगर अपील खारिज हुई, तो नीरव को 2026 की शुरुआत तक भारत लाया जा सकता है। यूके हाईकोर्ट ने पहले ही भारत को ‘मित्र राष्ट्र’ माना है और आर्थर रोड जेल की सुविधाओं पर संतुष्टि जताई है। नीरव का प्रत्यर्पण विजय माल्या और मेहुल चोकसी जैसे अन्य भगोड़ों के लिए भी संदेश होगा। फिलहाल, टीम की लंदन यात्रा प्रत्यर्पण प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की दिशा में बड़ा कदम है।
