नेहरू की विरासत पर BJP का हमला: सोनिया गांधी का तीखा पलटवार, कहा- इतिहास को तोड़-मरोड़ने की साजिश अस्वीकार्य
नेहरू की विरासत पर BJP का हमला: सोनिया गांधी का तीखा पलटवार, कहा- इतिहास को तोड़-मरोड़ने की साजिश अस्वीकार्य
नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 5 दिसंबर 2025 को दिल्ली के जवाहर भवन में ‘नेहरू सेंटर इंडिया’ के उद्घाटन समारोह में केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को आधुनिक भारत का प्रमुख निर्माता बताते हुए आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल नेहरू को बदनाम करने और उनकी विरासत को मिटाने की सुनियोजित साजिश रच रहा है। सोनिया ने कहा कि यह केवल व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि देश की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक नींव को उखाड़ फेंकने का प्रयास है।
समारोह में कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित के साथ बोलते हुए सोनिया ने स्पष्ट किया, “यह स्वाभाविक है कि पंडित नेहरू जैसे महान व्यक्तित्व के जीवन और कार्यों का विश्लेषण और आलोचना होती रहे। लेकिन आजकल एक व्यापक प्रवृत्ति दिख रही है कि उन्हें उनके समय, चुनौतियों और ऐतिहासिक संदर्भ से अलग करके देखा जाए। उनके प्रति सुनियोजित अपमान, विकृति, तिरस्कार और बदनामी का अभियान अस्वीकार्य है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि नेहरू को छोटा करने का मकसद स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका को कमजोर करना और इतिहास को स्वार्थपूर्ण तरीके से फिर से लिखना है।
सोनिया ने BJP-RSS की विचारधारा पर सीधा निशाना साधा, बिना नाम लिए। उन्होंने कहा, “इनकी विचारधारा का स्वाधीनता आंदोलन में कोई योगदान नहीं था, संविधान निर्माण में कोई भूमिका नहीं थी। बल्कि इन्होंने संविधान की प्रतियां जलाईं और उसका खुलकर विरोध किया। यही वह विचारधारा है जिसने घृणा का वातावरण इतना भड़काया कि महात्मा गांधी की हत्या हुई। आज भी उनके हत्यारों की इनके अनुयायी खुलेआम पूजा करते हैं।” यह बयान गुजरात में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेहरू पर बाबरी मस्जिद वाले बयान के ठीक बाद आया, जहां उन्होंने दावा किया था कि नेहरू सरकारी खर्च पर मस्जिद बनाना चाहते थे, लेकिन सरदार पटेल ने रोका। सोनिया ने इसे नेहरू के खिलाफ बदनामी का हिस्सा बताया।
उन्होंने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं कि जवाहरलाल नेहरू को बदनाम करने का यह प्रोजेक्ट सत्ताधारी वर्ग का मुख्य एजेंडा है। उनका मकसद सिर्फ उन्हें मिटाना नहीं, बल्कि राष्ट्र की बुनियाद को उखाड़ फेंकना है – वही नींव जिस पर देश खड़ा हुआ।” सोनिया ने नेहरू को संसदीय लोकतंत्र, समावेशिता और वैज्ञानिक सोच का प्रतीक बताया, जो आज भी प्रासंगिक है।
समारोह में नेहरू के 100 खंडों वाली डिजिटल आर्काइव (nehruarchive.in) का भी लॉन्च हुआ, जो 1903 से उनकी मृत्यु तक के कार्यों को सर्चेबल बनाता है। सोनिया ने अपील की, “हमें व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से इस साजिश का मुकाबला करना होगा। यह नेहरू की स्मृति के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है।” उन्होंने कहा कि अगर हम सफल हुए, तो नेहरू का सपना जीवंत रहेगा।
यह दुर्लभ भाषण सोनिया का लंबे समय बाद आया, जो कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा लगता है। BJP ने इसे “इतिहास की विकृति” बताया, जबकि कांग्रेस ने इसे नेहरू की विरासत बचाने का आह्वान माना। राजनीतिक गलियारों में यह बयान बहस छेड़ चुका है, खासकर 2026 चुनावों से पहले। नेहरू सेंटर अब नेहरू के विचारों को बढ़ावा देने का केंद्र बनेगा।
