नीतीश के बेटे निशांत की राजनीति में एंट्री तय? JDU नेता संजय झा का खुला संकेत, पार्टी की कमान संभालने का दबाव
नीतीश के बेटे निशांत की राजनीति में एंट्री तय? JDU नेता संजय झा का खुला संकेत, पार्टी की कमान संभालने का दबाव
बिहार की सियासत में एक नया मोड़ आ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार की राजनीति में सक्रिय एंट्री की अटकलें तेज हो गई हैं, जब JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने पटना एयरपोर्ट पर खुला इशारा दिया। झा ने कहा कि पार्टी के नेता, कार्यकर्ता और समर्थक सभी चाहते हैं कि निशांत JDU की कमान संभालें, लेकिन अंतिम फैसला निशांत का ही होगा। यह बयान नीतीश और निशांत के सामने दिया गया, जो सियासी गलियारों में हलचल मचा रहा है।
शुक्रवार को पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से घिरे संजय झा ने स्पष्ट कहा, “पार्टी के लोग, शुभचिंतक और समर्थक सभी निशांत कुमार को JDU में काम करते देखना चाहते हैं। नीतीश जी ने 20 सालों में जो काम किया, उसी पर जनता ने विश्वास जताया। अब निशांत को फैसला लेना है कि कब और कैसे वे पार्टी जॉइन करेंगे।” पास खड़े निशांत ने मुस्कुराते हुए कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन यह बयान बिना नीतीश की सहमति के नहीं आया माना जा रहा। JDU के अंदरूनी स्रोतों के मुताबिक, हाल के विधानसभा चुनावों में NDA की ऐतिहासिक जीत के बाद पार्टी में उत्तराधिकारी की बहस तेज हो गई है। निशांत को नालंदा या इस्लामपुर जैसी सीट से चुनाव लड़ाने की भी चर्चा है।
नीतीश कुमार हमेशा परिवारवाद के खिलाफ रहे हैं, लेकिन अब 74 साल की उम्र में उनकी सेहत और पार्टी की भविष्य की चिंता ने निशांत को आगे लाने का माहौल बना दिया है। 50 वर्षीय निशांत लो-प्रोफाइल जीवन जीते हैं—शादीशुदा नहीं, राजनीति से दूर। लेकिन चुनाव से पहले JDU कार्यकर्ताओं ने उनके नाम पर पोस्टर लगाए थे। सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने तो यहां तक कहा कि “निशांत में JDU संभालने की क्षमता है, मैं उन्हें इस्लामपुर से जिता दूंगा।” विपक्षी नेता भी इसे नीतीश की कमजोरी बता रहे, लेकिन JDU के लिए यह नया चेहरा हो सकता है।
पिछले सितंबर में JDU ने निशांत की एंट्री पर ब्रेक लगाया था, लेकिन अब चुनावी सफलता के बाद हवा बदली नजर आ रही। BBC की रिपोर्ट के अनुसार, नीतीश के बाद पार्टी में कोई मजबूत नंबर दो नहीं टिका, इसलिए निशांत को लाने की मांग जेडीयू के कई नेता कर रहे। क्या निशांत जल्दी ही सक्रिय होंगे? या यह सिर्फ अटकलें हैं? सियासी जानकारों का मानना है कि 2026 के लोकसभा चुनावों से पहले यह तय हो जाएगा। बिहार की सत्ता की कुर्सी पर निशांत का आगमन NDA के समीकरण को भी प्रभावित कर सकता है।
