छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में हसदेव अरण्य बचाओ आंदोलन: ग्रामीणों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प, टीआई समेत 6 पुलिसकर्मी घायल
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में हसदेव अरण्य बचाओ आंदोलन: ग्रामीणों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प, टीआई समेत 6 पुलिसकर्मी घायल
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के हसदेव अरण्य क्षेत्र में परसा कोल ब्लॉक के लिए जंगलों की कटाई का विरोध कर रहे ग्रामीणों और पुलिस के बीच बुधवार (3 दिसंबर 2025) को हिंसक झड़प हो गई। इस टकराव में थाना प्रभारी (टीआई) समेत आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए, जबकि कई ग्रामीणों को भी चोटें आईं। घटना उदयपुर थाना क्षेत्र के फुलपारा जंगल में हुई, जहां ग्रामीणों ने पेड़ कटाई रोकने के लिए धरना दे रखा था। पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए भारी बल तैनात किया, लेकिन ग्रामीणों के पत्थरबाजी और विरोध ने मामला बिगाड़ दिया।
जिला प्रशासन के अनुसार, परसा ईस्ट और केंटिया कोयला खदान परियोजना के दूसरे चरण के तहत 200 हेक्टेयर से अधिक जंगल काटने का काम चल रहा है। पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद रैयल्टी जमा करने वाली कंपनी ने कटाई शुरू की, लेकिन स्थानीय आदिवासी समुदाय ने इसे अपनी आजीविका और पर्यावरण के लिए खतरा बताते हुए विरोध जताया। ग्रामीणों ने सुबह से ही पेड़ों पर चढ़कर और रास्ते रोककर कटाई रोकी। दोपहर करीब 2 बजे जब पुलिस ने उन्हें हटाने की कोशिश की, तो ग्रामीणों ने पत्थर फेंके और लाठियां चलाईं। जवाब में पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया, जिसमें लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लिया गया।
सूरजपुर एसपी योगेश पटेल ने बताया, “ग्रामीणों ने तीर-कमान और धारदार हथियारों से हमला किया, जिससे टीआई संजय सिंह समेत 6 पुलिसकर्मी घायल हुए। चार ग्रामीणों को भी मामूली चोटें आईं। स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन अतिरिक्त फोर्स तैनात है।” घायल पुलिसकर्मियों को अंबिकापुर के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमारा जंगल हमारी मां है। कंपनी के लिए हजारों पेड़ काटना गलत है। हम लड़ते रहेंगे।”
यह घटना हसदेव अरण्य बचाओ आंदोलन का ताजा अध्याय है, जो 2011 से चल रहा है। पिछले महीने भी इसी क्षेत्र में इसी तरह की झड़प हुई थी, जिसमें 13 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर इसे “आदिवासियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन” बताया और बीजेपी सरकार पर “जोर-जबरदस्ती” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ विधानसभा में सर्वसम्मति से हसदेव कटाई रोकने का प्रस्ताव पास हुआ था, फिर यह हिंसा क्यों?” पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी केंद्र और राज्य सरकार की मांग की।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि हसदेव अरण्य एशिया का सबसे बड़ा सल वन क्षेत्र है, जो जैव विविधता से भरपूर है। कोल इंडिया की इस परियोजना से 12 गांव विस्थापित हो सकते हैं। ग्रामीण संगठन ‘हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति’ ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री को पत्र लिखा है। जिला कलेक्टर ने शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि कटाई कानूनी है, लेकिन ग्रामीणों की चिंताओं पर सुनवाई होगी। फिलहाल, क्षेत्र में तनाव बरकरार है, और अतिरिक्त सुरक्षा बल पहुंचाए गए हैं। यह घटना आदिवासी अधिकारों और विकास के बीच संतुलन की बहस को फिर तेज कर रही है।
