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‘जब तक भारत के टुकड़े नहीं होते’, बांग्लादेशी रिटायर्ड जनरल के पाकिस्तानी आर्मी चीफ जैसे खतरनाक ख्वाब

‘…जब तक भारत के टुकड़े नहीं होते’, बांग्लादेशी रिटायर्ड जनरल के पाकिस्तानी आर्मी चीफ जैसे खतरनाक ख्वाब

दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ाने वाली एक चौंकाने वाली बयानबाजी ने भारत को फिर से निशाने पर ले लिया है। बांग्लादेश के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल अब्दुस सत्तार ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा, “जब तक भारत के टुकड़े नहीं होते, तब तक इस क्षेत्र में शांति संभव नहीं है।” यह बयान पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर के उन विवादास्पद विचारों से मिलता-जुलता है, जिनमें वे भारत को “विभाजित” करने और कश्मीर को “आजाद” कराने की बातें करते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा भी है।

जनरल सत्तार, जो बांग्लादेश आर्मी के पूर्व हाई रैंकिंग अधिकारी रह चुके हैं, ने अपने बयान में भारत को “क्षेत्रीय आक्रामक” करार दिया। उन्होंने दावा किया कि 1971 की जंग के बावजूद, भारत की “विस्तारवादी नीतियां” बांग्लादेश और पाकिस्तान दोनों के लिए खतरा बनी हुई हैं। “भारत का विभाजन ही एकमात्र समाधान है, वरना हमेशा संघर्ष बना रहेगा,” उन्होंने कहा। यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जहां इसे पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा का हिस्सा बताया जा रहा है।

आसिम मुनीर के बयानों की याद ताजा हो गई, जिन्होंने अप्रैल 2025 में एक प्राइवेट इवेंट में कहा था, “भारत के बांधों को नष्ट कर दिल्ली पर कब्जा करना होगा।” मुनीर ने दो-राष्ट्र सिद्धांत को दोहराते हुए हिंदू-मुस्लिम सभ्यताओं के बीच “अटूट भेद” की बात की और कश्मीर को “कब्जे वाले क्षेत्र” कहा। अगस्त 2025 में ब्रसेल्स में डायस्पोरा को संबोधित करते हुए उन्होंने भारत के खिलाफ “आतंकी लॉन्च पैड” बनाने की योजना का जिक्र किया। इन बयानों ने भारत-पाक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया, खासकर जब पाकिस्तान में मस्जिदों और मदरसों के जरिए भर्ती अभियान तेज हो गया।

बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक उथल-पुथल के बाद अंतरिम सरकार ने पाकिस्तान के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाया है। जनवरी 2025 में बांग्लादेश के लेफ्टिनेंट जनरल एस. एम. कमरुल हसन की पाकिस्तान यात्रा इसका प्रमाण है, जहां दोनों सेनाओं ने “क्षेत्रीय सुरक्षा” पर चर्चा की। पूर्वी पाकिस्तान के रूप में बांग्लादेश का इतिहास 1971 की आजादी से जुड़ा है, फिर भी कुछ रिटायर्ड अफसरों के ऐसे बयान पुरानी कटुता को हवा दे रहे हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे “अपरिपक्व और खतरनाक” बताते हुए कूटनीतिक विरोध दर्ज किया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बयान चीन-पाकिस्तान गठजोड़ का हिस्सा हो सकते हैं, जो भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है। रक्षा विश्लेषक मेजर जनरल (रिटायर्ड) जी. डी. बख्शी ने कहा, “ये सपने याह्या खान जैसे पूर्व पाकिस्तानी जनरलों के थे, जिनकी वजह से बांग्लादेश बना। मुनीर और सत्तार जैसे लोग इतिहास दोहरा रहे हैं।” भारत ने जवाब में सीमा सुरक्षा मजबूत की है और बांग्लादेश के साथ आर्थिक संबंधों पर नजर रखी जा रही है।

यह घटना दर्शाती है कि कैसे पुरानी दुश्मनी नई साजिशें रच रही है। भारत को सतर्क रहना होगा, क्योंकि ऐसे “ख्वाब” हकीकत में तब्दील होने की कोशिशें जारी हैं। शांति के लिए पड़ोसी देशों को आत्ममंथन करना चाहिए, वरना क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी।

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