राजनीति

पूर्व सीएम येदियुरप्पा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: POCSO मामले में ट्रायल पर रोक, हाईकोर्ट को नई सुनवाई का आदेश

पूर्व सीएम येदियुरप्पा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: POCSO मामले में ट्रायल पर रोक, हाईकोर्ट को नई सुनवाई का आदेश

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बी.एस. येदियुरप्पा को सुप्रीम कोर्ट ने POCSO मामले में अंतरिम राहत प्रदान की है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी और कर्नाटक सरकार व शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि क्या येदियुरप्पा को हाईकोर्ट में मेरिट पर नई सुनवाई का मौका मिलना चाहिए, इस पर विचार किया जाए। यह फैसला येदियुरप्पा की विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर आया, जिसमें उन्होंने कर्नाटक हाईकोर्ट के 13 नवंबर के आदेश को चुनौती दी थी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस ज्योमल्या बागची की बेंच ने आदेश में कहा, “कोऑर्डिनेट बेंच ने पिछली निर्णय की गलत व्याख्या की, जिसमें याचिका को मेरिट पर सुनने से इनकार कर दिया गया। इसलिए, हम नोटिस जारी करते हैं कि याचिकाकर्ता को 7 फरवरी 2025 के आदेश के तहत दी गई छूट के आधार पर नई सुनवाई हो।” वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा और सिद्धार्थ दवे ने बहस में कहा कि अभियोजन पक्ष ने महत्वपूर्ण बयानों को दबाया और ट्रायल कोर्ट ने असंगतियों को नजरअंदाज कर यांत्रिक रूप से आगे बढ़ा। उन्होंने 88 वर्षीय येदियुरप्पा को चार बार सीएम रहने का हवाला देते हुए “राजनीतिक प्रतिशोध” का आरोप लगाया।

मामला मार्च 2024 में दर्ज हुआ, जब एक महिला (जो अब दिवंगत हैं) ने आरोप लगाया कि 2 फरवरी 2024 को बेंगलुरु निवास पर येदियुरप्पा ने उनकी 17 वर्षीय बेटी का यौन शोषण किया, जब वे पहले हमले की शिकायत के लिए मदद मांगने गईं। सिद्घिवनगर पुलिस ने POCSO एक्ट के तहत FIR दर्ज की, जो बाद में CID को सौंपी गई। जांच के बाद चार्जशीट में येदियुरप्पा के अलावा तीन अन्य पर IPC की धारा 354A (यौन उत्पीड़न), 204 (साक्ष्य नष्ट करना) और 214 (रिश्वत देकर अपराध छिपाना) के तहत आरोप लगाए गए। जुलाई 2024 में ट्रायल कोर्ट ने संज्ञान लिया, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे सही ठहराया।

फरवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने पहली संज्ञान रद्द कर ट्रायल कोर्ट को पुनर्विचार का आदेश दिया था, जिसमें येदियुरप्पा को सभी कानूनी आपत्तियां उठाने की छूट दी गई। लेकिन हाईकोर्ट ने इसे नजरअंदाज कर दिया, जिसके खिलाफ SLP दायर की गई। अब ट्रायल रुका हुआ है, जब तक सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई न करे। कर्नाटक सरकार को जवाब देने का समय दिया गया है।

भाजपा ने फैसले का स्वागत किया, जबकि विपक्ष ने “राजनीतिक दबाव” का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता डी.के. शिवकुमार ने कहा, “न्याय व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।” येदियुरप्पा ने कहा, “मैं निर्दोष हूं, सत्य सामने आएगा।” यह मामला कर्नाटक की सियासत में पहले से ही गरम था, जहां येदियुरप्पा की वापसी की अटकलें हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला POCSO मामलों में प्रक्रियागत कमियों पर रोशनी डालता है। फिलहाल, येदियुरप्पा को ट्रायल से मुक्ति मिली है, लेकिन केस का अंतिम फैसला बाकी है।

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