दिल्ली समेत कई एयरपोर्ट्स पर GPS स्पूफिंग का खतरा: सरकार ने संसद में कंफर्म किया, 465+ घटनाएं दर्ज!
दिल्ली समेत कई एयरपोर्ट्स पर GPS स्पूफिंग का खतरा: सरकार ने संसद में कंफर्म किया, 465+ घटनाएं दर्ज!
भारत की हवाई सीमाओं पर एक गंभीर खतरा मंडरा रहा है। केंद्र सरकार ने संसद को बताया कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, अमृतसर, बेंगलुरु और चेन्नई समेत कई प्रमुख एयरपोर्ट्स के आसपास उड़ान भर रहे विमानों में GPS स्पूफिंग और GNSS (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) इंटरफेरेंस की घटनाएं बढ़ रही हैं। यह जानकारी नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लोकसभा में दी, जहां उन्होंने कहा कि नवंबर 2023 से फरवरी 2025 तक बॉर्डर क्षेत्रों (खासकर अमृतसर और जम्मू) में 465 ऐसी घटनाएं दर्ज की गईं।
GPS स्पूफिंग एक साइबर हमला है, जिसमें नकली सैटेलाइट सिग्नल भेजकर विमानों के नेविगेशन सिस्टम को गुमराह किया जाता है। इससे पायलटों को गलत लोकेशन, ऊंचाई या दिशा दिखाई देती है, जो दुर्घटना का कारण बन सकता है। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGIA) पर नवंबर 2025 के पहले हफ्ते में 7 दिनों तक ‘सीवियर’ स्पूफिंग की शिकायतें मिलीं, जिससे 800 से ज्यादा फ्लाइट्स प्रभावित हुईं। पायलटों को फॉल्स टेरेन वार्निंग्स मिलीं, और ADS-B (ऑटोमैटिक डिपेंडेंट सर्विलांस-ब्रॉडकास्ट) सिस्टम की इंटीग्रिटी शून्य हो गई। एयर इंडिया, इंडिगो, स्पाइसजेट और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस जैसे ब्रिटिश एयरवेज, लुफ्थांसा प्रभावित हुईं।
DGCA ने 10 नवंबर को सर्कुलर जारी कर पायलटों, ATC कंट्रोलर्स और टेक्निकल यूनिट्स को निर्देश दिया कि किसी भी GPS अनोमली (जैसे पोजीशन एरर, नेविगेशन फेलियर या स्पूफ्ड डेटा) को घटना के 10 मिनट के अंदर रिपोर्ट करें। रिपोर्ट में डेट, टाइम, एयरक्राफ्ट टाइप, फ्लाइट रूट, कोऑर्डिनेट्स और इंटरफेरेंस टाइप (जैमिंग या स्पूफिंग) का जिक्र अनिवार्य है। NSA अजित डोभाल के नेतृत्व में NSCS ने जांच शुरू कर दी है, क्योंकि दिल्ली जैसे आंतरिक क्षेत्रों में यह पहली बार हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पाकिस्तान या चीन जैसे पड़ोसी देशों की ‘ग्रे-जोन’ स्ट्रैटेजी हो सकती है, जहां ड्रोन और जैमर्स का इस्तेमाल आम है।
सरकार ने कहा कि ग्राउंड-बेस्ड नेविगेशन सिस्टम्स को अपग्रेड किया जा रहा है, ताकि GPS फेल होने पर वैकल्पिक तरीके उपलब्ध हों। AAI एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत कर रही है। ICAO ने 2024 में GNSS इंटरफेरेंस को ‘साइबर रिस्क’ घोषित किया था। लेकिन विपक्ष ने संसद में सवाल उठाए – क्या यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है? क्या NaVIC (भारतीय रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) को तेजी से लागू किया जाएगा?
विशेषज्ञ चेताते हैं कि स्पूफिंग से ऑटोपायलट फेल हो सकता है, और व्यस्त एयरपोर्ट्स पर यह घातक साबित हो सकता है। DGCA ने पायलटों को ट्रेनिंग दी है, लेकिन रिपोर्टिंग बढ़ाने से डेटा कलेक्शन तेज होगा। क्या सरकार स्पूफिंग को रोक पाएगी? हवाई यात्रा पर नजरें टिकी हैं।
