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बलूचिस्तान में FC मुख्यालय पर फिदायीन हमला: 6 आतंकी घुसे, 3 मारे गए; BLA ने ली जिम्मेदारी

बलूचिस्तान में FC मुख्यालय पर फिदायीन हमला: 6 आतंकी घुसे, 3 मारे गए; BLA ने ली जिम्मेदारी

पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में एक के बाद एक हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। रविवार रात चागई जिले के नोक्कुंडी शहर में फ्रंटियर कोर (FC) के दक्षिणी क्षेत्रीय मुख्यालय पर 6 फिदायीन हमलावरों ने घात लगाकर हमला कर दिया। मुख्य द्वार पर एक हमलावर ने खुद को विस्फोटक से उड़ा लिया, जिसके बाद बाकी हमलावर अंदर घुसने की कोशिश करने लगे। सुरक्षा बलों की त्वरित जवाबी कार्रवाई में कम से कम 3 आतंकवादियों को मार गिराया गया, जबकि बाकी की तलाश जारी है। FC के प्रवक्ता ने बताया कि ऑपरेशन अभी भी चल रहा है, और कोई भी हमलावर भाग नहीं सका। इस घटना में FC के जवान जख्मी बताए जा रहे हैं, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।

डॉन न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, हमला रात करीब 10 बजे शुरू हुआ, जब हमलावरों ने भारी हथियारों से गोलीबारी की। विस्फोट की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी, और मुख्य द्वार के आसपास मलबा बिखर गया। FC ने बयान जारी कर कहा, “हमारे जवान ने साहसपूर्वक जवाब दिया और हमलावरों को घेर लिया। तीनों की लाशें बरामद हो चुकी हैं, जबकि बाकी दो घायल होकर भागने की कोशिश कर रहे हैं।” प्रतिबंधित संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने हमले की जिम्मेदारी ली है। BLA के प्रवक्ता ने कहा कि यह हमला “बलूच अधिकारों की रक्षा” के लिए था, और वे विदेशी खनन परियोजनाओं (जैसे रेको डीक और सैंदक) को निशाना बना रहे हैं, जहां FC की सुरक्षा तैनात है।

यह हमला बलूचिस्तान में बढ़ते विद्रोह का ताजा उदाहरण है। 24 नवंबर को पेशावर के FC मुख्यालय पर भी इसी तरह का सुसाइड अटैक हुआ था, जबकि क्वेटा और डेरा मुराद जमाली में शनिवार को 7 विस्फोटों ने रेलवे ट्रैक को उड़ा दिया। पिछले 10 दिनों में पाकिस्तानी सेना ने TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) से जुड़े 30 आतंकियों को मार गिराया है, लेकिन बलूच अलगाववादी ग्रुप्स जैसे BLA और BLF की गतिविधियां तेज हो गई हैं। नोक्कुंडी, जो ईरान सीमा के करीब है, रेको डीक जैसे बहु-अरब डॉलर के खनन प्रोजेक्ट्स का केंद्र है, जहां विदेशी इंजीनियरों की सुरक्षा के लिए FC तैनात है। हमलावरों ने FC कंपाउंड के अलावा इन प्रोजेक्ट्स से जुड़े एक कंपाउंड को भी निशाना बनाया।

पाकिस्तानी आर्मी ने कहा कि यह “सुरक्षा लापरवाही” नहीं, बल्कि दुश्मनों की साजिश है। बलूचिस्तान में 2024 में ही सैकड़ों सैनिक शहीद हो चुके हैं, और TTP ने 2022 में युद्धविराम तोड़ने के बाद हमलों को अंजाम दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक संसाधनों पर कब्जे की लड़ाई ने विद्रोह को भड़का दिया है। क्या पाकिस्तान इन हमलों को रोक पाएगा? बलूचिस्तान की सड़कें खून से लाल हो रही हैं, और आम नागरिकों के साथ सुरक्षा बल निशाने पर हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस अस्थिरता पर टिकी है।

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