अन्तर्राष्ट्रीय

बांग्लादेश में शेख हसीना पर नया आरोप: 2009 BDR विद्रोह हत्याकांड में ‘हत्यारी’ करार, भारत पर भी साजिश का इल्जाम

बांग्लादेश में शेख हसीना पर नया आरोप: 2009 BDR विद्रोह हत्याकांड में ‘हत्यारी’ करार, भारत पर भी साजिश का इल्जाम

बांग्लादेश की सियासत में भूचाल मच गया है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर 2009 के बांग्लादेश राइफल्स (BDR) विद्रोह में 74 लोगों की सामूहिक हत्या का आरोप लगाते हुए एक सरकारी आयोग ने उन्हें दोषी ठहरा दिया है। आयोग की रिपोर्ट में दावा किया गया कि हसीना ने ही इस खूनी विद्रोह का आदेश दिया था, ताकि सेना को कमजोर किया जा सके। यह रिपोर्ट नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने जारी की है, जो हसीना के 2024 में छात्र आंदोलन से उखाड़ फेंकने के बाद सत्ता में है। भारत को भी इस साजिश में शामिल बताते हुए ढाका ने हसीना के प्रत्यर्पण की मांग तेज कर दी है।

25-26 फरवरी 2009 को ढाका के पिलखाना मुख्यालय में शुरू हुए इस विद्रोह ने पूरे देश को हिला दिया था। BDR के जवान अपने वरिष्ठ सेना अधिकारियों के खिलाफ भड़के, जिनमें डायरेक्टर जनरल शकील अहमद समेत 57 अफसरों की क्रूर हत्या कर दी गई। कुल 74 लोग मारे गए, जिनमें नागरिक भी शामिल थे। हसीना की सरकार के तहत हुई पुरानी जांच ने इसे सैनिकों की सैलरी और सुविधाओं पर असंतोष से जोड़ा था, लेकिन विपक्ष हमेशा से आरोप लगाता रहा कि यह हसीना की साजिश थी। अब नेशनल इंडिपेंडेंट इन्वेस्टिगेशन कमीशन ने 16 साल पुराने इस ‘मासाकर’ की फिर जांच की। रिपोर्ट में कहा गया कि हसीना ने अपने सांसद फजले नूर तपोश को ‘प्रिंसिपल कोऑर्डिनेटर’ बनाकर हत्याओं का ‘ग्रीन सिग्नल’ दिया। कमीशन चीफ एएलएम फजलुर रहमान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह हसीना सरकार की साजिश थी, जिसमें विदेशी ताकतों (भारत) का हाथ था। सेना को कमजोर करने के लिए अफसरों को निशाना बनाया गया।”

यूनुस ने रिपोर्ट का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “देश लंबे समय से इस हत्याकांड के पीछे की सच्चाई से अंधेरे में था। अब सत्य सामने आ गया है।” रिपोर्ट में भारत पर आरोप लगाया गया कि उसने हसीना को समर्थन देकर बांग्लादेश की सेना को ‘कमजोर’ करने की कोशिश की। विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने कहा, “हसीना अब दोषी है, भारत से उसका जल्द प्रत्यर्पण अपेक्षित है। लेकिन यह हमारे द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित न करे।” हसीना, जो अगस्त 2024 के छात्र विद्रोह के बाद भारत में शरण ले चुकी हैं, पर पहले ही कई मुकदमे चल रहे हैं। नवंबर 2025 में छात्र आंदोलन दमन के लिए उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी। अब BDR मामले में भी मुकदमा तय माना जा रहा है।

हसीना की अवामी लीग ने रिपोर्ट को ‘राजनीतिक साजिश’ करार दिया। पार्टी प्रवक्ता ने कहा, “यह यूनुस सरकार का बदला है। पुरानी जांच साफ थी – विद्रोह सैनिकों के गुस्से से हुआ।” लेकिन विपक्षी बीएनपी ने समर्थन किया। नेता मिर्ज़ा फकीरुल इस्लाम अलम ने कहा, “हसीना का शासन तानाशाही था। यह रिपोर्ट न्याय की जीत है।” सोशल मीडिया पर #HasinaGuilty ट्रेंड कर रहा है, जहां यूजर्स पुरानी घटनाओं के वीडियो शेयर कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट भारत-बांग्लादेश संबंधों में नया तनाव पैदा करेगी। फरवरी 2026 के चुनावों से पहले हसीना का प्रत्यर्पण मुद्दा गरमाता जा रहा है। क्या भारत हसीना को सौंपेगा? ढाका की नजर दिल्ली पर टिकी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *