राजनीति

राजस्थान सरकार ने लिया यू-टर्न: बाबरी मस्जिद ढहाए जाने को ‘शौर्य दिवस’ मनाने का आदेश वापस, विरोध के बाद शिक्षा विभाग ने किया खारिज

राजस्थान सरकार ने लिया यू-टर्न: बाबरी मस्जिद ढहाए जाने को ‘शौर्य दिवस’ मनाने का आदेश वापस, विरोध के बाद शिक्षा विभाग ने किया खारिज

राजस्थान सरकार ने बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की 32वीं वर्षगांठ (6 दिसंबर) को ‘शौर्य दिवस’ के रूप में मनाने के विवादास्पद आदेश को महज कुछ घंटों में वापस ले लिया। शिक्षा विभाग ने इसे “भ्रमपूर्ण” बताते हुए खारिज कर दिया, और कहा कि सभी सरकारी व निजी स्कूलों में परीक्षाओं के कारण कोई कार्यक्रम संभव नहीं। यह यू-टर्न विपक्षी दलों, मुस्लिम संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के तीखे विरोध के बाद आया, जो इसे “सांप्रदायिक ध्रुवीकरण” का प्रयास बता रहे थे।

शनिवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशालय (बीकानेर) ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें सभी स्कूलों को 6 दिसंबर को ‘शौर्य दिवस’ के रूप में मनाने और छात्रों में “राष्ट्रीयता की भावना जगाने” के लिए भाषण, निबंध लेखन, योग सत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम, राम मंदिर आंदोलन पर चर्चा और ‘शौर्य यात्रा’ आयोजित करने का निर्देश दिया गया था। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इसे समर्थन देते हुए कहा था, “यह राम जन्मभूमि आंदोलन के ‘शौर्य’ का प्रतीक है, जो छात्रों को भारतीय संस्कृति से जोड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर को मंजूरी दी है, इसलिए इसे ब्रेवरी एक्ट के रूप में मनाना चाहिए।” उन्होंने 6 दिसंबर को निर्धारित परीक्षाओं को भी रद्द करने का ऐलान किया था।

लेकिन रविवार सुबह ही विभाग ने यू-टर्न ले लिया। निदेशालय ने स्पष्ट किया, “राज्य के सभी स्कूलों में 5-6 दिसंबर को परीक्षाएं चल रही हैं, इसलिए कोई अन्य कार्यक्रम संभव नहीं। ‘शौर्य दिवस’ स्थगित है।” सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर यह फैसला लिया गया, क्योंकि आगामी पंचायत व नगर निकाय चुनावों से पहले विवाद BJP के लिए नुकसानदेह हो सकता था। यह इस महीने दूसरी बार है जब ऐसा आदेश जारी होने के बाद वापस लिया गया।

विपक्ष का तीखा विरोध

कांग्रेस ने इसे “अपराधी घटना को महिमामंडित करने” की कोशिश बताया। प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी ने कहा, “बाबरी विध्वंस एक आपराधिक कृत्य था, जो सुप्रीम कोर्ट ने भी गैरकानूनी माना। स्कूलों में इसे मनाना छात्रों के बीच नफरत फैलाएगा।”  मुस्लिम संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कड़ी निंदा की, कहा कि यह साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ेगा। एक कार्यकर्ता ने कहा, “6 दिसंबर दंगा और दर्द का दिन है, इसे ‘शौर्य’ कहना घाव पर नमक छिड़कना है।”

क्या था विवाद का केंद्र?

1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विध्वंस हिंदुत्व कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया था, जिसके बाद देशभर में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए। 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे अवैध माना, लेकिन विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण की मंजूरी दी। BJP सरकारें कुछ राज्यों में इसे ‘शौर्य दिवस’ के रूप में मना रही हैं, लेकिन राजस्थान में यह पहली बार प्रयास था।

शिक्षा विभाग ने अब सभी स्कूलों को पत्र भेजकर स्पष्ट किया कि कोई कार्यक्रम न हो। क्या यह स्थायी फैसला है या चुनावों के बाद दोबारा प्रयास होगा? BJP की ओर से अभी कोई टिप्पणी नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *