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इजरायल: भ्रष्टाचार मुकदमे में घिरे पीएम नेतन्याहू ने राष्ट्रपति से मांगी क्षमा, इतिहास में पहली बार कोई कार्यवाहक पीएम ऐसा कदम

इजरायल: भ्रष्टाचार मुकदमे में घिरे पीएम नेतन्याहू ने राष्ट्रपति से मांगी क्षमा, इतिहास में पहली बार कोई कार्यवाहक पीएम ऐसा कदम

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को अपने लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार मुकदमे में राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से क्षमा (पार्डन) की औपचारिक मांग की है। नेतन्याहू ने दावा किया कि यह मुकदमा देश को बांट रहा है और उनकी सरकार चलाने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है। राष्ट्रपति कार्यालय ने इसे “असाधारण अनुरोध” करार देते हुए कहा कि सभी संबंधित पक्षों की राय लेने के बाद इस पर विचार किया जाएगा। यह इजरायल के इतिहास में पहली घटना है जब कोई कार्यवाहक प्रधानमंत्री अपने पद पर रहते हुए राष्ट्रपति से आपराधिक मुकदमे में क्षमा मांग रहा है।

नेतन्याहू के वकीलों ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा कि पीएम अभी भी मानते हैं कि मुकदमे का अंत उनकी बरी होने के साथ होगा, लेकिन राष्ट्रीय हित में क्षमा जरूरी है। उन्होंने लिखा, “यह मुकदमा देश के लिए विवाद का केंद्र बन गया है, और मैं इसकी व्यापक जिम्मेदारी स्वीकार करता हूं।” नेतन्याहू ने एक वीडियो बयान में कहा, “मैं देश के हित में इस कदम का समर्थन करने वाले सभी से अपील करता हूं।” लिकुड पार्टी ने वीडियो जारी किया, जिसमें पीएम ने कहा कि कोर्ट में सप्ताह में तीन बार पेशी की वजह से उनकी नेतृत्व क्षमता प्रभावित हो रही है।

यह अनुरोध तीन अलग-अलग भ्रष्टाचार मामलों से जुड़ा है, जो 2019 में दायर हुए थे। इनमें रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और विश्वास का उल्लंघन के आरोप हैं। केस 1000 में अमीर उद्योगपतियों से 700,000 शेकेल (लगभग 21 करोड़ रुपये) के उपहार लेने का मामला; केस 2000 में मीडिया कवरेज के बदले पक्षपातपूर्ण कवरेज का आरोप; और केस 4000 में टेलीकॉम कंपनी बेजेक के साथ सौदेबाजी शामिल है। नेतन्याहू इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं और इसे “राजनीतिक साजिश” बताते हैं। मुकदमा मई 2020 से जेरूसलम डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में चल रहा है, जहां तीन जजों की बेंच सुनवाई कर रही है।

इजरायल के इतिहास में नेतन्याहू पहले कार्यवाहक पीएम हैं जो पद पर रहते हुए आपराधिक मुकदमे का सामना कर रहे हैं। राष्ट्रपति की क्षमा की परंपरा दोष सिद्ध होने के बाद ही दी जाती है, लेकिन नेतन्याहू के वकीलों ने तर्क दिया कि सार्वजनिक हित में अपवाद संभव है। राष्ट्रपति हर्जोग ने कहा, “राष्ट्रपति करुणा की भूमिका में केवल तभी आता है जब अन्य सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हों।” यह अनुरोध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप के कुछ हफ्तों बाद आया है। ट्रंप ने नवंबर में हर्जोग को पत्र लिखकर नेतन्याहू को क्षमा देने की अपील की थी, इसे “राजनीतिक और अनुचित अभियोजन” बताया था। ट्रंप ने अक्टूबर में इजरायली संसद में कहा था कि मुकदमा रद्द हो या क्षमा दी जाए।

विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। विपक्षी नेता यायर लापिड ने कहा, “क्षमा के बिना अपराध स्वीकारोक्ति, पश्चाताप और राजनीतिक जीवन से तत्काल संन्यास नहीं तो यह अस्वीकार्य है।” डेमोक्रेट्स पार्टी के यायर गोलन ने एक्स पर लिखा, “केवल दोषी ही क्षमा मांगता है। आठ साल के मुकदमे के बाद नेतन्याहू को क्षमा की जरूरत पड़ी।” वहीं, नेतन्याहू के सहयोगी, जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर ने समर्थन किया, कहा कि यह “देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण” है।

यह कदम 2026 के चुनाव वर्ष से पहले आया है, जब नेतन्याहू की लोकप्रियता गाजा युद्ध और न्यायिक सुधारों से प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि क्षमा से लोकतांत्रिक संस्थाओं को झटका लगेगा। हर्जोग का फैसला आने वाले दिनों में तय करेगा कि क्या यह विवाद समाप्त होगा या और भड़केगा। फिलहाल, मुकदमा जारी रहेगा।

 

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