उत्तराखंड को मिलेगा दुर्लभ व्हाइट टाइगर: ओडिशा के साथ वन्यजीव एक्सचेंज प्लान पर सहमति, दो रेड पांडा और गुरल जोड़ा भेजेगा राज्य
उत्तराखंड को मिलेगा दुर्लभ व्हाइट टाइगर: ओडिशा के साथ वन्यजीव एक्सचेंज प्लान पर सहमति, दो रेड पांडा और गुरल जोड़ा भेजेगा राज्य
देहरादून: उत्तराखंड के वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। लंबे प्रयासों के बाद ओडिशा सरकार ने राज्य को एक दुर्लभ व्हाइट टाइगर देने पर सहमति जता दी है। यह समझौता दोनों राज्यों के बीच वन्यजीवों के आदान-प्रदान पर आधारित है, जिसके तहत उत्तराखंड ओडिशा को दो रेड पांडा और एक गुरल पक्षी का जोड़ा देगा। व्हाइट टाइगर को देहरादून चिड़ियाघर में रखा जाएगा, जहां पर्यटक इसका दीदार कर सकेंगे। यह पहल राज्य के वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को नई ऊंचाई देगी।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह प्रस्ताव वर्षों से चल रहा था। ओडिशा के नंदनकानन चिड़ियाघर से व्हाइट टाइगर लाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। मुख्य वन्यजीव अधीक्षक समीर सिन्हा ने बताया, “ओडिशा के मुख्य वन्यजीव अधीक्षक सुशांत नंदा ने लिखित में सहमति दी है। व्हाइट टाइगर को देहरादून चिड़ियाघर में प्रदर्शित किया जाएगा, जो पर्यटकों के लिए बड़ा आकर्षण बनेगा।” व्हाइट टाइगर, जो बंगाल टाइगर का दुर्लभ रंग रूप है, ओडिशा के नंदनकानन में सफलतापूर्वक पाले जा रहे हैं। 1980 में यहां ही पहली बार कैप्टिव ब्रीडिंग से व्हाइट टाइगर पैदा हुए थे।
एक्सचेंज प्लान: क्या बदलेगा क्या?
समझौते के तहत उत्तराखंड नैनीताल चिड़ियाघर से दो रेड पांडा (हिमालयी लाल पांडा) भेजेगा। ये पांडा पूर्वी हिमालय के निवासी हैं और उत्तराखंड में संरक्षित हैं। इसके अलावा, गुरल पक्षी (हिमालयी बकरी जैसा जानवर) का एक जोड़ा भी ओडिशा जाएगा। गुरल को उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ों में पाया जाता है, और यह दुर्लभ प्रजाति है। ओडिशा के नंदनकानन चिड़ियाघर में इन प्रजातियों को बेहतर संरक्षण मिलेगा, जबकि उत्तराखंड को व्हाइट टाइगर मिलने से चिड़ियाघर की विविधता बढ़ेगी।
यह पहल 2024 में शुरू हुई थी, जब उत्तराखंड ने ओडिशा को चार लेपर्ड्स देने का प्रस्ताव रखा था। अब व्हाइट टाइगर पर फोकस है। वन मंत्री डॉ. शीतल मिश्रा ने कहा, “यह एक्सचेंज वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करेगा। व्हाइट टाइगर पर्यटकों को आकर्षित करेगा, जिससे इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।” देहरादून चिड़ियाघर पहले से ही रॉयल बंगाल टाइगर, हिमालयन ब्लैक बियर और रेड पांडा का घर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम जैव विविधता संरक्षण के लिए सकारात्मक है। वन्यजीव वैज्ञानिक डॉ. अनिल शाह ने कहा, “वन्यजीवों का एक्सचेंज जेनेटिक डाइवर्सिटी बढ़ाता है। उत्तराखंड में व्हाइट टाइगर से पर्यटन में 20-30% उछाल आ सकता है।” हालांकि, परिवहन और क्वारंटीन की प्रक्रिया में सावधानी बरती जाएगी।
उत्तराखंड, जो जिम कॉर्बेट और राजाजी जैसे नेशनल पार्क्स का घर है, पहले से ही बंगाल टाइगर और स्नो लेपर्ड के लिए जाना जाता है। व्हाइट टाइगर की मौजूदगी से चिड़ियाघर और इको-टूरिज्म को नया आयाम मिलेगा। प्रक्रिया पूरी होते ही ट्रांसफर होगा, और जल्द ही पर्यटक इसका दीदार कर सकेंगे। यह खबर वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशी का मौका है!
