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किरायेदारों को बड़ी राहत: नए किराया नियमों में सिक्योरिटी डिपॉजिट 2 महीने, रेंट हाइक पर सख्ती

किरायेदारों को बड़ी राहत: नए किराया नियमों में सिक्योरिटी डिपॉजिट 2 महीने, रेंट हाइक पर सख्ती

नई दिल्ली: भारत सरकार ने ‘होम रेंट रूल्स 2025’ के तहत किरायेदारों के लिए ऐतिहासिक बदलाव किए हैं, जो मॉडल टेनेंसी एक्ट (MTA) पर आधारित हैं। ये नियम 1 जुलाई 2025 से लागू हो चुके हैं और बड़े शहरों जैसे मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली, हैदराबाद व पुणे में किरायेदारों को भारी राहत देंगे। पहले 6-10 महीने की सिक्योरिटी मनी और अचानक रेंट बढ़ोतरी किरायेदारों की कमर तोड़ देती थी, लेकिन अब डिपॉजिट की सीमा तय, रेंट हाइक पर 90 दिन का नोटिस और जुर्माने पर सख्ती से किरायेदारों को मजबूत सुरक्षा मिली है।

सबसे बड़ी राहत सिक्योरिटी डिपॉजिट पर है। आवासीय संपत्ति के लिए अब अधिकतम 2 महीने का किराया ही लिया जा सकता है, जबकि कमर्शियल प्रॉपर्टी के लिए 6 महीने। इससे छात्रों, युवा पेशेवरों और प्रवासी मजदूरों को नई जगह शिफ्ट करने में आसानी होगी। पहले मेट्रो शहरों में 10 महीने की डिपॉजिट एक साल के किराए के बराबर हो जाती थी, जो किरायेदारों के लिए बड़ा बोझ थी। अब लैंडलॉर्ड को भी फायदा—डिपॉजिट रिफंड पर विवाद कम होंगे, क्योंकि स्टैंडर्ड एग्रीमेंट टेम्प्लेट में सब क्लियर होगा।

रेंट बढ़ोतरी के नियम भी सख्त हो गए हैं। अब साल में सिर्फ एक बार ही रेंट बढ़ाया जा सकेगा, वो भी 5-10% तक और 90 दिन के लिखित नोटिस के बाद। अचानक बढ़ोतरी या कई बार हाइक अब अवैध है। अगर किराया 50,000 रुपये से ज्यादा है, तो डिजिटल पेमेंट अनिवार्य और TDS लागू होगा। इससे किरायेदारों को बजट प्लानिंग में मदद मिलेगी, जबकि लैंडलॉर्ड को बाजार दरों के अनुरूप स्थिर आय सुनिश्चित होगी।

किराया समझौते को अनिवार्य रूप से रजिस्टर कराना होगा—साइनिंग के 2 महीने के अंदर ऑनलाइन या लोकल रजिस्ट्रार ऑफिस में। आधार-बेस्ड ई-वेरिफिकेशन से फर्जीवी बनाना मुश्किल हो जाएगा। न रजिस्टर करने पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। स्टैंडर्ड टेम्प्लेट में मेंटेनेंस, इंस्पेक्शन, नोटिस पीरियड और एविक्शन क्लॉज सब तय हैं। किरायेदार मरम्मत के लिए 30 दिन का नोटिस दे सकेंगे, अगर लैंडलॉर्ड न करे तो किराए से कटौती कर सकेंगे।

जुर्माने और विवादों पर भी नई व्यवस्था है। फोर्सफुल एविक्शन, बिजली-पानी काटना या धमकी पर कानूनी सजा और जुर्माना। स्पेशल रेंट कोर्ट्स और ट्रिब्यूनल्स विवादों (जैसे डिपॉजिट रिफंड, डैमेज क्लेम) को 60 दिनों में सुलझाएंगे। पहले कोर्ट में सालों लग जाते थे। लैंडलॉर्ड्स को भी फायदा—3 महीने का किराया न देने पर तुरंत ट्रिब्यूनल जा सकेंगे। टैक्स फाइलिंग आसान: किराया आय ‘हाउसिंग प्रॉपर्टी’ कैटेगरी में, TDS लिमिट 6 लाख तक बढ़ी।

ये बदलाव किरायेदारों को आर्थिक बोझ से मुक्ति देंगे और बाजार को पारदर्शी बनाएंगे। टैक्स बडी जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि इससे किरायेदारों की संख्या बढ़ेगी और विवाद 50% कम होंगे। हालांकि, राज्य स्तर पर लागू करने में थोड़ी देरी हो सकती है। किरायेदारों से अपील है—नए नियमों का फायदा उठाएं, रजिस्ट्रेशन कराएं और अधिकार जानें। इससे किराया बाजार ज्यादा स्थिर और समावेशी बनेगा।

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