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यूपी के हापुड़ में पुतले का अंतिम संस्कार: 50 लाख इंश्योरेंस क्लेम के लालच में रची साजिश, पुलिस ने खोला राज

यूपी के हापुड़ में पुतले का अंतिम संस्कार: 50 लाख इंश्योरेंस क्लेम के लालच में रची साजिश, पुलिस ने खोला राज

हापुड़। उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के गढ़मुक्तेश्वर स्थित ब्रजघाट गंगा तट पर गुरुवार दोपहर एक ऐसी घटना घटी, जिसने सबके होश उड़ा दिए। दिल्ली से चार युवक एक ‘शव’ लेकर श्मशान घाट पहुंचे और चिता सजाकर अंतिम संस्कार की तैयारी करने लगे। लेकिन जब कफन हटाया गया, तो अंदर प्लास्टिक का मैनीक्विन (पुतला) निकला। यह नकली दाह संस्कार 50 लाख रुपये के इंश्योरेंस क्लेम के लिए रची गई शातिर साजिश का हिस्सा था। पुलिस ने दो मुख्य आरोपी को हिरासत में ले लिया, जबकि दो फरार हैं। इस घटना ने सवाल खड़े कर दिए कि आखिर इतनी गहरी साजिश कैसे रच ली गई।

घटना दोपहर करीब 1 बजे की है। एचआर नंबर वाली आई-20 कार में सवार चार युवक ब्रजघाट श्मशान घाट पहुंचे। उनके पास घी, लकड़ी और अन्य सामग्री थी। उन्होंने पुतले को चादर और कफन में लपेटा, जैसे असली शव हो। नगर पालिका के कर्मचारी नितिन ने शव की प्रविष्टि दर्ज करने के लिए डिटेल मांगी, लेकिन आरोपी जल्दबाजी में रस्में पूरी किए बिना चिता पर पुतला रखने लगे। मौजूद लोगों को शक हुआ। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “वे धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन नहीं कर रहे थे। बस जल्दी से आग लगाना चाहते थे। हमने कफन हटाया, तो प्लास्टिक का डमी निकला। सब हैरान रह गए।”

सूचना मिलते ही गढ़मुक्तेश्वर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। आरोपी भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन दो को पकड़ लिया गया। हिरासत में लिए गए कमल सोमानी (दिल्ली के कैलाशपुरी कॉलोनी निवासी) और आशीष खुराना (उत्तम नगर निवासी) ने पूछताछ में खुलासा किया। कमल ने बताया कि वह कपड़ा व्यापारी है और 50 लाख रुपये के कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। उसकी दुकान पर पहले काम करने वाले नीरज के भाई अंशुल कुमार के नाम उसने 50 लाख का इंश्योरेंस पॉलिसी कराई थी। अंशुल को गायब करके ‘मृत’ घोषित करने का प्लान था। इसके लिए दुकान का पुराना प्लास्टिक मैनीक्विन इस्तेमाल किया गया।

कमल के अनुसार, प्लान यह था कि पुतले का अंतिम संस्कार कराकर श्मशान की रसीद लें, फिर दिल्ली के एक अस्पताल में अंशुल की ‘मौत’ का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाएं। इसके बाद इंश्योरेंस क्लेम फाइल कर 50 लाख वसूलने थे, जिससे कर्ज चुकता हो जाता। कार से दो और डमी पुतले बरामद हुए, जो बैकअप के लिए थे। पुलिस ने कमल से पूछा तो वह बोला, “अंशुल के मरने की पुष्टि होने पर मुझे 50 लाख मिलते। इसलिए मैंने उसे मरा दिखाने के लिए यह साजिश रची।” आशीष उसका साथी था, जो साजिश में मदद कर रहा था।

एसपी हापुड़ ललित वशिष्ठ ने बताया, “यह इंश्योरेंस फ्रॉड का केस है। दोनों आरोपी दिल्ली के हैं। फरार साथियों की तलाश जारी है। अंशुल कुमार की लोकेशन ट्रेस की जा रही है।” सीओ स्तुति सिंह ने कहा कि प्रारंभिक जांच में पुतला इंसानी शव जैसा सजाया गया था। घाट कर्मचारियों ने भी शक जताया था, क्योंकि आरोपी रस्में पूरी नहीं कर रहे थे। पुलिस ने आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया।

यह घटना इंश्योरेंस धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फ्रॉड में श्मशान रसीद और फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट का इस्तेमाल आम हो गया है। हापुड़ पुलिस ने अलर्ट जारी कर दिया है। फिलहाल, जांच जारी है और अंशुल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास हो रहे हैं। यह साजिश नाकाम होने से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन लालच की यह मिसाल सबक सिखाती है।

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