मोक्षदा एकादशी 2025: 30 नवंबर या 1 दिसंबर? सही तिथि, महत्व और व्रत कथा एक नजर में
मोक्षदा एकादशी 2025: 30 नवंबर या 1 दिसंबर? सही तिथि, महत्व और व्रत कथा एक नजर में
इस साल मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी यानी मोक्षदा एकादशी 30 नवंबर 2025 (रविवार) को मनाई जाएगी।
सही तिथि और पारण समय (पंचांग के अनुसार)
एकादशी तिथि प्रारंभ: 29 नवंबर 2025, रात 11:07 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त: 30 नवंबर 2025, रात 09:45 बजे रात तक
व्रत पारण समय: 1 दिसंबर 2025, सुबह 06:55 से 09:07 बजे तक
इसलिए 30 नवंबर को ही व्रत रखा जाएगा, और 1 दिसंबर सुबह पारण होगा। (कुछ जगहों पर सूर्योदय व्यापिनी एकादशी मानकर 30 को ही रखा जाता है)
मोक्षदा एकादशी का महत्व
इसे “मोक्ष प्राप्ति की एकादशी” कहा जाता है।
मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था – इसलिए इसे गीता जयंती भी कहते हैं।
इस व्रत से पितरों को मोक्ष मिलता है और स्वयं को भी जन्म-मृत्यु के चक्कर से मुक्ति मिलती है।
गीता पाठ करने से अक्षय पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
व्रत कथा (संक्षेप में)
प्राचीन काल में गोकुल नगर में वैखानस नाम का राजा राज करता था। एक रात स्वप्न में उसने अपने पिता को नरक में तड़पते देखा। ऋषियों ने बताया कि पिता के पापों के कारण ऐसा हुआ है। राजा ने परवत मुनि से उपाय पूछा। मुनि बोले – “मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का व्रत करो और पुण्य अपने पिता को दान कर दो।”
राजा ने मोक्षदा एकादशी का विधि-विधान से व्रत किया, गीता पाठ किया और पुण्य पिता को समर्पित कर दिया। पिता को तुरंत मोक्ष मिला और आकाशवाणी हुई – “तुम्हारा कुल मोक्ष को प्राप्त हुआ।”
क्या करें इस दिन?
सुबह स्नान कर भगवान दामोदर (विष्णु) की पूजा करें।
तुलसी के सामने दीपक जलाएं, गीता का पाठ जरूर करें।
चावल, जौ, गेहूं, मूंग दान करें।
रात में जागरण और भजन-कीर्तन करें।
फलाहार रखें, नमक न खाएं।
इस एकादशी का पुण्य इतना बड़ा है कि सैकड़ों यज्ञों के बराबर फल देता है।
इस बार 30 नवंबर को व्रत रखें और 1 दिसंबर सुबह पारण करें।
