चीन की मनमानी पर भारत का करारा जवाब: केंद्र ने मंजूर की ₹7,280 करोड़ की रेयर अर्थ मैग्नेट स्कीम, आयात पर कटेगा निर्भरता
चीन की मनमानी पर भारत का करारा जवाब: केंद्र ने मंजूर की ₹7,280 करोड़ की रेयर अर्थ मैग्नेट स्कीम, आयात पर कटेगा निर्भरता
चीन की बढ़ती मनमानी और रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर उसके एकाधिकार के बीच केंद्र सरकार ने आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ‘स्कीम टू प्रमोट मैन्युफैक्चरिंग ऑफ सिन्टर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स’ को मंजूरी दे दी। इस योजना पर कुल ₹7,280 करोड़ का खर्च होगा, जो अगले सात वर्षों में चलेगी। इसका मुख्य उद्देश्य रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स (REPM) के उत्पादन को बढ़ावा देना है, ताकि इलेक्ट्रिक वाहन (EV), नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों में चीन पर निर्भरता कम हो।
इस योजना के तहत देश में 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) की एकीकृत REPM उत्पादन क्षमता विकसित की जाएगी। यह पहली बार होगा जब भारत में रेयर अर्थ ऑक्साइड्स को धातु, फिर मिश्र धातु और अंत में तैयार मैग्नेट्स बनाने की पूरी प्रक्रिया स्थापित होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, “यह योजना विकसित भारत@2047 के विजन को साकार करेगी। चीन के निर्यात प्रतिबंधों के बीच यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्वावलंबन के लिए महत्वपूर्ण है।” सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे “रणनीतिक निर्णय” बताते हुए कहा कि वैश्विक निविदा प्रक्रिया से पांच कंपनियों को चुना जाएगा, प्रत्येक को अधिकतम 1,200 MTPA क्षमता आवंटित होगी।
वर्तमान में भारत REPM के 95% से अधिक आयात पर निर्भर है, जिसमें से ज्यादातर चीन से आता है। हाल ही में चीन ने रेयर अर्थ एलिमेंट्स के निर्यात पर सख्त नियंत्रण लगाए हैं, जो वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह योजना न केवल आयात बिल को कम करेगी, बल्कि 50,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करेगी। योजना का बजट ₹6,450 करोड़ के बिक्री-आधारित प्रोत्साहन (पांच वर्षों के लिए) और ₹750 करोड़ की पूंजी सब्सिडी पर आधारित है। इसमें दो वर्ष की तैयारी अवधि के बाद प्रोत्साहन वितरण होगा।
रक्षा उत्पादन विभाग के सचिव अजय भट्ट ने बताया कि REPM मैग्नेट्स EV मोटर्स, विंड टर्बाइन, मिसाइल सिस्टम और मेडिकल डिवाइसेज में महत्वपूर्ण हैं। योजना से भारत वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनेगा और नेट जीरो 2070 लक्ष्य को गति मिलेगी। उद्योग जगत ने स्वागत किया है। टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा, “यह EV सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।” हालांकि, चुनौतियां बनी हुई हैं – रेयर अर्थ खनन में रेडियोएक्टिव तत्वों के कारण तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत है, जिसके लिए विदेशी कंपनियों के साथ जॉइंट वेंचर पर जोर दिया जा रहा है।
यह निर्णय अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध के बीच आया है, जहां रेयर अर्थ्स को हथियार बनाया जा रहा है। भारत का यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ को नई ऊंचाई देगा। योजना की निगरानी भारी उद्योग मंत्रालय करेगा, और पहली क्षमता 2027 तक चालू होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, चीन की मनमानी के बीच भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है।
