Wednesday, September 16, 2026
उत्तराखंड

उत्तराखंड क्रांति दल के फील्ड मार्शल दिवाकर भट्ट का निधन: कल हरिद्वार में अंतिम संस्कार

उत्तराखंड क्रांति दल के फील्ड मार्शल दिवाकर भट्ट का निधन: कल हरिद्वार में अंतिम संस्कार

उत्तराखंड राज्य आंदोलन के सबसे मुखर और आक्रामक चेहरों में शुमार उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष व पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट का आज शाम करीब 4:30 बजे हरिद्वार स्थित उनके आवास (तरुण हिमालय) पर निधन हो गया। 72 वर्षीय भट्ट पिछले कई दिनों से किडनी और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। वे 18 नवंबर से देहरादून के इंद्रेश महंत अस्पताल में भर्ती थे, जहां से उन्हें कुछ दिन पहले घर लाया गया था।

उनके निधन की खबर मिलते ही राज्यभर में शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत समेत सभी दलों के नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है।

राज्य आंदोलन का ‘फील्ड मार्शल’

दिवाकर भट्ट को UKD कार्यकर्ता प्यार से “फील्ड मार्शल” कहते थे। 1994 के राज्य आंदोलन के दौरान वे सबसे आगे रहते थे। मुजफ्फरनगर कांड, रामपुर तिराहा कांड, श्रीनगर गोलीकांड—हर जगह उनकी गिरफ्तारी हुई, लेकिन हौसला नहीं डगमगाया। 1996 में UKD के टिकट पर वे डोईवाला से विधायक चुने गए और 2002-2007 के अंतरिम सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे।

राजनीतिक सफर

1996: डोईवाला से पहली बार विधायक (UKD)

2002-2007: UKD-BJP गठबंधन सरकार में कैबिनेट मंत्री (सिंचाई, आपदा प्रबंधन)

2012: UKD के केंद्रीय अध्यक्ष बने

2017 तक लगातार सक्रिय रहे, बाद में स्वास्थ्य कारणों से पीछे हटे

अंतिम संस्कार कल सुबह

दिवाकर भट्ट का पार्थिव शरीर आज रात उनके हरिद्वार आवास पर रखा गया है। कल 26 नवंबर को सुबह 11 बजे खड़खड़ी श्मशान घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। UKD ने राज्य में तीन दिन का शोक घोषित किया है।

नेताओं का शोक संदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी: “उत्तराखंड के निर्माण में दिवाकर भट्ट जी का योगदान अविस्मरणीय है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।”

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत: “मेरे साथी, मेरे मित्र चले गए। राज्य आंदोलन की एक पूरी पीढ़ी आज अनाथ हो गई।”

त्रिवेंद्र सिंह रावत: “उनका जाना उत्तराखंड के लिए अपूरणीय क्षति है।”

राज्य सरकार ने उनके परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है।

उत्तराखंड ने अपने एक सच्चे सपूत को खो दिया।

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