जल जीवन मिशन में गड़बड़ी पर पीएम मोदी का सख्त रुख: दोषी कार्रवाई न होने तक फंडिंग बंद, 12 राज्यों में अफसरों पर एक्शन
जल जीवन मिशन में गड़बड़ी पर पीएम मोदी का सख्त रुख: दोषी कार्रवाई न होने तक फंडिंग बंद, 12 राज्यों में अफसरों पर एक्शन
हर घर नल से जल पहुंचाने के महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन (JJM) में कई राज्यों में भ्रष्टाचार और कार्यान्वयन की गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ा रुख अपनाया है। आला सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने जल शक्ति मंत्रालय को निर्देश दिया है कि जहां-जहां गड़बड़ी की शिकायतें आई हैं, वहां सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही, जब तक संबंधित राज्य सरकारें ऐसे मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं करतीं, तब तक केंद्र सरकार अपनी ओर से इस मिशन के लिए एक पैसा भी जारी न करे। यह फैसला भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को मजबूत करने का हिस्सा है।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस के साथ आगे बढ़ा जाए और जो भी दोषी हों—चाहे अधिकारी हों या ठेकेदार—उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने भी लोकसभा में कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि 12 राज्यों में पहले ही अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। यह निर्देश एक हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग के बाद आया, जहां पीएम ने मिशन की प्रगति और कमियों पर विस्तार से चर्चा की।
जल जीवन मिशन: लक्ष्य और चुनौतियां
2019 में शुरू हुए JJM का लक्ष्य 2024 तक देश के हर ग्रामीण घर में नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था, लेकिन अब इसे 2028 तक बढ़ा दिया गया है। केंद्र सरकार ने 2025-26 के लिए 67,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।33f971 वर्तमान में 80% से अधिक ग्रामीण घरों (लगभग 15 करोड़) को टैप कनेक्शन मिल चुके हैं, लेकिन कई राज्यों में घटिया काम, फंड्स का दुरुपयोग और फर्जी कनेक्शन की शिकायतें हैं।
केंद्र ने अक्टूबर 2025 में 100 से अधिक नोडल ऑफिसर टीम्स तैनात कीं, जो ग्राउंड इंस्पेक्शन कर रही हैं। राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे CBI, लोकायुक्त और एंटी-करप्शन विभागों द्वारा दर्ज FIRs, अधिकारियों की सस्पेंशन, ब्लैकलिस्टिंग और रिकवरी का डिटेल रिपोर्ट दें। ठेकेदारों और थर्ड-पार्टी इंस्पेक्शन एजेंसियों पर भी नजर है।
प्रभावित राज्य: पश्चिम बंगाल से कर्नाटक तक शिकायतें
पश्चिम बंगाल: केवल 56% घरों को कनेक्शन, केंद्र ने एक्शन रिपोर्ट मांगी। राज्य सरकार ने इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बताया।
कर्नाटक: 86% कवरेज के बावजूद केंद्र का 13,000 करोड़ का फंड अटका। CM सिद्धारमैया ने पीएम से हस्तक्षेप मांगा।
मेघालय: MLA ने अपने नाम पर फर्जी कनेक्शन का आरोप लगाया। 82% प्रगति, लेकिन दिसंबर 2025 तक डेडलाइन।
अन्य राज्य: 12 राज्यों में अधिकारी सस्पेंड या हटाए गए।
केंद्र ने राज्यों को चेतावनी दी है कि पब्लिक शिकायतों पर एक पेज का डिटेल रिपोर्ट दें, वरना फंडिंग रोकी जाएगी।
मंत्री सीआर पाटिल का बयान: ‘कोई बख्शा नहीं जाएगा’
जल शक्ति मंत्री पाटिल ने संसद में कहा, “कुछ शिकायतें सही पाई गईं। BJP शासित या गैर-BJP राज्य, किसी को नहीं छोड़ा।” उन्होंने 17% से 80% कवरेज की प्रगति का जिक्र किया, लेकिन भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस पर जोर दिया। पाटिल ने कहा कि घटिया काम या फाइनेंशियल अनियमितताओं पर FIR दर्ज होंगी।
आगे क्या? 2028 तक सख्त निगरानी
यह निर्देश मिशन को पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। केंद्र ने 2028 डेडलाइन तय की है, लेकिन फंडिंग अब परफॉर्मेंस पर निर्भर। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे ग्रामीणों को जल्द राहत मिलेगी, लेकिन राज्यों को जवाबदेही बढ़ानी होगी। पीएम मोदी का यह फैसला भ्रष्टाचार मुक्त भारत की दिशा में मजबूत संकेत है। अधिक अपडेट्स के लिए जल शक्ति मंत्रालय की वेबसाइट चेक करें।
