ममता का बीजेपी को खुला चैलेंज: ‘चाहे जितनी एजेंसियां लगा दो, मेरे साथ नहीं खेल पाओगे’
ममता का बीजेपी को खुला चैलेंज: ‘चाहे जितनी एजेंसियां लगा दो, मेरे साथ नहीं खेल पाओगे’
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी पर फिर से तीखा हमला बोला है। नॉर्थ 24 परगना के बनगांव में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता ने कहा, “चाहे जितनी एजेंसियां लगा दो, चाहे पूरी केंद्र सरकार की ताकत लगा दो, मेरे साथ खेल नहीं पाओगे।” यह बयान केंद्रीय जांच एजेंसियों—जैसे ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स—के कथित दुरुपयोग को लेकर आया है, जिन्हें ममता विपक्ष को कमजोर करने का हथियार बता रही हैं। रैली में ममता ने सीरोज (SIR) विवाद और CAA को भी निशाने पर लिया, जबकि बीजेपी ने इसे ‘डर का इजहार’ करार दिया।
बनगांव रैली: मातुआ समुदाय को संबोधित, बीजेपी पर तंज
बनगांव, जो मातुआ समुदाय का गढ़ है, में ममता की रैली चुनावी माहौल में हुई। ममता ने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी पैसे बांटने की कोशिश करेगी, लेकिन “लोग पैसे ले लेंगे और फिर भी बीजेपी को वोट नहीं देंगे।” उन्होंने CAA को ‘धर्म आधारित विभाजन का हथकंडा’ बताते हुए कहा कि बीजेपी चुनावों के समय ही इसे मुद्दा बनाती है, जबकि बंगाल में सभी को बराबर अधिकार हैं। ममता ने फॉर्म भरने वालों से अपील की, “अपनी समझ का इस्तेमाल करें, सोशल मीडिया के आधार पर भविष्य मत तय करें। बंगाल में कई बोलियां हैं, लेकिन भाषा एक है—बांग्ला।”
ममता ने ईसीआई (चुनाव आयोग) से भी गुहार लगाई कि बीजेपी की ‘साजिशों’ पर नजर रखे। उन्होंने कहा कि केंद्र की एजेंसियां विपक्षी नेताओं को फंसाने में लगी हैं, लेकिन बंगाल की जनता ‘दीदी’ के साथ है। यह बयान 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर आया लगता है, जहां टीएमसी और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर है।
SIR विवाद: ममता ने घेरा, बीजेपी ने पलटवार किया
रैली में ममता ने ‘सीरोज’ (SIR) पर भी निशाना साधा, जो बंगाल सरकार की एक योजना है। उन्होंने कहा कि बीजेपी इसे ‘वोट खरीदने का हथकंडा’ बता रही है, लेकिन यह गरीबों के लिए है। बीजेपी ने तुरंत पलटवार किया। प्रदेश अध्यक्ष सुकांता मजुमदार ने कहा, “ममता का चैलेंज खोखला है। एजेंसियां कानून के अनुसार काम कर रही हैं, और ममता को डर इसलिए लग रहा क्योंकि भ्रष्टाचार उजागर हो रहा है।” केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने ट्वीट किया, “ममता जी, एजेंसियां स्वतंत्र हैं। आपकी सरकार पर 100 से ज्यादा केस हैं, सच्चाई सामने आएगी।”
यह विवाद पुराना है। ममता ने पहले भी एजेंसियों को ‘बीजेपी का हथियार’ बताया है। 2023 में उन्होंने कहा था कि 2024 चुनावों के बाद ये एजेंसियां बीजेपी के पीछे पड़ जाएंगी। हाल ही में मुर्शिदाबाद दंगों पर ममता ने बीएसएफ और केंद्रीय एजेंसियों को ‘पूर्व नियोजित साजिश’ का हिस्सा ठहराया था।
ममता का पुराना रुख: एजेंसियों पर लगातार आरोप
ममता का बीजेपी पर एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप कोई नया नहीं है। 2024 लोकसभा चुनावों के दौरान उन्होंने कूच बिहार रैली में कहा था कि बीएसएफ, सीआईएसएफ और ईडी बीजेपी के इशारे पर काम कर रही हैं। उन्होंने विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील की थी। मई 2023 में भी ममता ने कहा, “सीबीआई-ईडी बीजेपी को वोट नहीं दिला पाएंगी।”
टीएमसी का दावा है कि ममता पर 100 से ज्यादा केस दर्ज हैं, जो राजनीतिक प्रतिशोध हैं। बीजेपी इसे ‘भ्रष्टाचार छिपाने की कोशिश’ बताती है। राजनीतिक विश्लेषक सुनील घोष कहते हैं, “ममता का यह चैलेंज बंगाल की जनता को लामबंद करने का तरीका है। 2026 चुनावों में CAA-NRC मुद्दा फिर गरमाएगा।”
टीएमसी समर्थकों ने ममता को ‘बंगाल की शेरनी’ कहा, जबकि बीजेपी यूजर्स ने मीम्स शेयर किए: “ममता जी, एजेंसियां तो बस गेस्ट हैं, असली खेल जनता खेलेगी।” एक यूजर ने लिखा, “चाहे जितनी एजेंसियां, दीदी की सरकार 2026 में फिर बनेगी!”
यह बयान बंगाल की सियासत को और गरमा देगा। ममता की टीएमसी 2024 लोकसभा में 29 सीटें जीत चुकी है, जबकि बीजेपी को 12 मिलीं। 2026 में बनगांव जैसे इलाकों में मातुआ वोट निर्णायक होंगे। ममता का चैलेंज बीजेपी को केंद्रीय ताकत के बावजूद ‘जमीनी हार’ का डर दिखा रहा है। फिलहाल, दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर हमलावर हैं, और बंगाल की सड़कें फिर गर्म हो चुकी हैं।
