भुने चने में ‘ऑरामाइन’ का जहर: कैंसर का खतरा, सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र को जगाया
भुने चने में ‘ऑरामाइन’ का जहर: कैंसर का खतरा, सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र को जगाया
बाजार में बिकने वाले भुने चनों को चमकदार बनाने के लिए कपड़ा रंगने वाले जहरीले केमिकल ‘ऑरामाइन’ का इस्तेमाल हो रहा है, जो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों को न्योता दे रहा है। इस गंभीर मिलावट को लेकर शिवसेना (UBT) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान को पत्र लिखा है। उन्होंने तत्काल जांच, सख्त कार्रवाई और जागरूकता अभियान की मांग की है। यह पत्र सोमवार को जारी किया गया, जो खाद्य सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहा है।
मिलावट का खुलासा: कैसे हो रहा है यह खेल?
प्रियंका चतुर्वेदी ने पत्र में एक हालिया रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें बताया गया कि भुने चनों को आकर्षक पीला रंग देने के लिए विक्रेता ‘ऑरामाइन’ नामक इंडस्ट्रियल डाई का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह डाई मुख्य रूप से कपड़ा, चमड़ा और कागज उद्योगों में रंगाई के लिए इस्तेमाल होती है। खाद्य पदार्थों में इसका मिश्रण पूरी तरह अवैध है। FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के अनुसार, यह केमिकल खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत प्रतिबंधित है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार में सस्ते भुने चने (प्रति किलो 50-80 रुपये) में यह मिलावट आम है। विक्रेता चनों को भूनने के बाद इस डाई को स्प्रे या मिलाकर चमकदार बनाते हैं, ताकि उपभोक्ता इन्हें ताजा और स्वादिष्ट समझें। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मिलावट छोटे-मोटे विक्रेताओं से लेकर बड़े पैकेज्ड ब्रांड्स तक फैली हुई है। दिल्ली, मुंबई और यूपी के बाजारों में सैंपल टेस्टिंग में 20-30% चनों में यह डाई पाई गई।
‘ऑरामाइन’ क्या है? क्यों इतना खतरनाक?
ऑरामाइन एक सिंथेटिक डाई है, जो पीला-नारंगी रंग देती है। यह कैंसरजन्य (कैंसर पैदा करने वाली) श्रेणी में आती है। WHO और FSSAI के अनुसार, यह केमिकल लीवर, किडनी और ब्लड कैंसर का जोखिम बढ़ाता है। लंबे समय तक सेवन से विषाक्तता (टॉक्सिसिटी) हो सकती है, जिसमें शामिल हैं:
पाचन संबंधी समस्याएं: उल्टी, दस्त, पेट दर्द।
त्वचा और आंखों पर असर: जलन, एलर्जी।
कैंसर का खतरा: यह डीएनए को डैमेज करता है, खासकर लीवर कैंसर।
अन्य: सिरदर्द, थकान, इम्यून सिस्टम कमजोर।
विशेषज्ञ डॉ. अनुराग अग्रवाल (AIIMS) ने कहा, “यह डाई खाने में मिलाने से शरीर में जमा हो जाती है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए घातक है।” भारत में हर साल 10 लाख कैंसर केस आते हैं, जिनमें 20% खाद्य मिलावट से जुड़े हैं।
सांसद का पत्र: तत्काल कार्रवाई की मांग
प्रियंका चतुर्वेदी ने पत्र में लिखा, “यह पब्लिक सेफ्टी का गंभीर उल्लंघन है। भुने चने जैसे हेल्दी स्नैक को जहर में बदलना अस्वीकार्य है।” उन्होंने मांग की:
राष्ट्रीय स्तर पर जांच: FSSAI और राज्य फूड लैब्स से सैंपल टेस्टिंग।
सख्त सजा: मिलावट करने वालों पर IPC की धारा 272-273 के तहत मुकदमा।
जागरूकता अभियान: TV, सोशल मीडिया पर चेतावनी।
निगरानी: बाजारों में रेगुलर रेड्स और लाइसेंसिंग सख्ती।
चतुर्वेदी ने कहा, “लोग भुने चने को प्रोटीन रिच स्नैक मानकर खाते हैं, लेकिन यह मिलावट उनकी जान ले रही है। सरकार को तुरंत कदम उठाना चाहिए।”
मिलावट रोकने के टिप्स: घर पर कैसे पहचानें?
भुने चनों को हेल्दी मानने वाले लाखों लोग अब सतर्क हैं। यहां कुछ आसान तरीके:
रंग चेक: असली चने का रंग हल्का भूरा होता है। अगर चमकदार पीला है, तो संदेह करें।
पाउडर टेस्ट: हाथ में रगड़ें; सफेद पाउडर निकले तो टैल्कम पाउडर मिला।
गंध: केमिकल वाली तेज गंध।
घुलनशीलता: पानी में डालें; रंग निकले तो डाई।
ब्रांड चुनें: FSSAI लाइसेंस वाले पैकेज्ड प्रोडक्ट्स लें।
एक्सपर्ट सलाह: घर पर ही चने भूनें। नमक-मसाले डालकर ओवन या तवे पर भूनें।
सरकार का क्या रुख? आगे क्या?
FSSAI ने पहले भी मसालों और दूध में मिलावट पर रेड्स चलाए हैं। अब ऑरामाइन पर विशेष अभियान की घोषणा संभावित है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, “मामले की जांच की जा रही है।” लेकिन विपक्ष का आरोप है कि निगरानी कमजोर है। प्रियंका का पत्र संसद में भी चर्चा का विषय बनेगा।
यह घटना खाद्य मिलावट के बढ़ते मामलों को उजागर करती है। 2024 में FSSAI ने 50,000 सैंपल टेस्ट किए, जिनमें 15% में मिलावट पाई गई। उपभोक्ताओं को सतर्क रहना होगा। अगर आपको संदेह हो, तो लोकल FSDA को शिकायत करें। हेल्दी स्नैकिंग के नाम पर जहर न खाएं—जागरूक रहें, सुरक्षित रहें।
