उत्तराखंड में वन्यजीव हमलों का कहर: रुद्रप्रयाग में गुलदार के बाद भालू का आतंक, 2025 में 45 मौतें, ग्रामीण दहशत में
उत्तराखंड में वन्यजीव हमलों का कहर: रुद्रप्रयाग में गुलदार के बाद भालू का आतंक, 2025 में 45 मौतें, ग्रामीण दहशत में
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में वन्यजीवों के बढ़ते हमलों ने आम जीवन को दहशत में डाल दिया है। रुद्रप्रयाग जिले में हाल ही में एक गुलदार के आतंक के बाद अब भालू हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। जाखोली ब्लॉक के धरकुड़ी गांव में एक भालू ने घास लेने गई सात महिलाओं पर हमला कर दिया, जिसमें सभी घायल हो गईं। वन विभाग ने स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों को एस्कॉर्ट करने की व्यवस्था की है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि रात होते ही गांव सूना पड़ जाता है। राज्य में 2025 में अब तक वन्यजीवों के हमलों से 45 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें भालू के हमलों में 6-7 मौतें शामिल हैं – यह आंकड़ा पिछले 25 वर्षों का सबसे ज्यादा है।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2000 से नवंबर 2025 तक भालू हमलों में 71 मौतें और 2,009 घायल हुए हैं, जबकि गुलदारों ने 539 लोगों की जान ली है। रुद्रप्रयाग, पौड़ी, चमोली, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जैसे जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। पौड़ी में भालुओं के लिए ‘शूट-एट-साइट’ ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं, जबकि रुद्रप्रयाग में हाल के 11 दिनों में तीन मौतें हुईं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, देरी से बर्फबारी और भोजन की कमी से भालू और गुलदार मानव बस्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। हिमालयी काला भालू (Ursus thibetanus) सर्दियों से पहले हाइपरफेजिया (भोजन संग्रह) में चले जाते हैं, जिससे हमले बढ़ जाते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में घायलों के लिए मुफ्त इलाज और मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की है। वन विभाग ने जागरूकता अभियान चलाया है, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा भड़क रहा है। उत्तरकाशी के भटवाड़ी ब्लॉक में महिलाएं अकेले खेतों में नहीं जातीं, जबकि पौड़ी के पंथर गांव में वन्यजीव हमलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए। PCCF वाइल्डलाइफ आरके मिश्रा ने कहा, “इकोलॉजिकल बदलावों से संघर्ष बढ़ा है। हम कैप्चर और ट्रैपिंग पर फोकस कर रहे हैं।”
विशेषज्ञों का आह्वान है कि आवास संरक्षण और कम्युनिटी प्रोग्राम्स जैसे ‘लिविंग विद लीपर्ड्स’ को मजबूत करें। यह संकट उत्तराखंड की पर्यावरण नीतियों पर सवाल खड़ा कर रहा है। अपडेट्स के लिए वन विभाग की वेबसाइट wildlife.uk.gov.in चेक करें।
