G20 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी बहिष्कार पर रामाफोसा का सख्त रुख: ‘अध्यक्षता खाली कुर्सी को सौंपेंगे’, US-साउथ अफ्रीका तनाव चरम पर
G20 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी बहिष्कार पर रामाफोसा का सख्त रुख: ‘अध्यक्षता खाली कुर्सी को सौंपेंगे’, US-साउथ अफ्रीका तनाव चरम पर
दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी में चल रहे G20 शिखर सम्मेलन (22-23 नवंबर 2025) को अमेरिका के बहिष्कार ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर ध्रुवीकरण का रूप दे दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के न आने और आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के बहिष्कार पर दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने गहरा असंतोष जताया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अमेरिका की अनुपस्थिति ‘उनकी हानि’ है और वे G20 अध्यक्षता को ‘खाली कुर्सी’ को सौंपेंगे, न कि किसी निचले स्तर के राजदूत को। यह बयान शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन (23 नवंबर) आया, जब रामाफोसा ने यूएस को ‘धमकी’ देने का आरोप लगाया।
विवाद का पूरा विवरण:
G20 का यह पहला अफ्रीकी शिखर सम्मेलन जोहान्सबर्ग के नासरेक एक्सपो सेंटर में हो रहा है, जहां 19 देशों के नेता मौजूद हैं। ट्रंप ने साउथ अफ्रीका को ‘जीस’ (G) में रहने लायक न बताते हुए बहिष्कार का ऐलान किया, कारण बताया—झूठे आरोप कि काले बहुमत वाली सरकार सफेद किसानों पर ‘नरसंहार’ कर रही है। व्हाइट हाउस ने इसे ‘DEI एजेंडा’ (विविधता, समानता, समावेशिता) का विरोध बताया, जो जलवायु परिवर्तन और विकासशील देशों की मांगों पर केंद्रित है। रामाफोसा ने व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव करोलिन लीविट के ‘रनिंग हिज माउथ’ वाले बयान पर पलटवार किया: “हम धमकियों से नहीं झुकेंगे।” उन्होंने कहा, “अमेरिका का अनुपस्थित रहना उनकी हानि है। हम G20 को आगे बढ़ाएंगे।”
अध्यक्षता हस्तांतरण पर विवाद चरम पर है। अमेरिका ने चार्ज डी अफेयर्स मार्क डी. डिलार्ड को केवल समापन समारोह के लिए भेजने का फैसला किया, लेकिन रामाफोसा के प्रवक्ता विंसेंट मग्वेन्या ने कहा, “राष्ट्रपति किसी जूनियर राजदूत को नहीं सौंपेंगे।” रामाफोसा ने पहले ‘खाली कुर्सी’ को प्रतीकात्मक रूप से हस्तांतरित करने की बात कही थी, लेकिन अब इसे ‘स्मूथ ट्रांजिशन’ न होने का सबूत बता रहे हैं। अगला G20 फ्लोरिडा में होगा, जहां ट्रंप ने एजेंडा को ‘सरल’ करने का वादा किया है।
पार्क्स ताऊ का बयान: व्यापारिक वार्ता जारी
दक्षिण अफ्रीका के व्यापार मंत्री पार्क्स ताऊ ने शिखर सम्मेलन के बाद (23 नवंबर) कहा कि अमेरिका के बहिष्कार के बावजूद US के साथ व्यापारिक वार्ता अगले महीने जारी रहेगी। उन्होंने कहा, “G20 एक अलग प्रक्रिया है, हम मुद्दों को अलग रखेंगे। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर चर्चा चलेगी।” ताऊ ने इसे ‘अफसोसजनक’ बताया कि US ने महत्वपूर्ण वैश्विक व्यापार मुद्दों पर चर्चा से वंचित रह गया। उन्होंने अफ्रीकी संघ के नेताओं को आमंत्रित करने का श्रेय रामाफोसा को दिया, जो G20 को ‘G20 मिलियन’ बनाने की दिशा में कदम है।
शिखर सम्मेलन के प्रमुख परिणाम:
घोषणा-पत्र अपनाया: US के बहिष्कार के बावजूद 19 देशों ने जलवायु संकट, विकासशील देशों के ऋण राहत और साफ ऊर्जा पर घोषणा-पत्र अपनाया। क्लाइमेट चेंज का जिक्र ट्रंप के संदेह के बावजूद शामिल किया गया।
अर्जेंटीना का विरोध: ट्रंप के सहयोगी जेवियर माइली की सरकार ने अंतिम समय में घोषणा से हटने का फैसला किया, लेकिन रामाफोसा ने इसे नजरअंदाज कर आगे बढ़ाया।
अन्य चर्चाएं: PM मोदी ने रामाफोसा से AI, महत्वपूर्ण खनिजों और खाद्य सुरक्षा पर बात की। ब्राजील के लुला और ऑस्ट्रेलिया के अल्बानीज जैसे नेताओं ने अफ्रीकी अध्यक्षता की सराहना की।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:
US पक्ष: व्हाइट हाउस ने रामाफोसा पर ‘अध्यक्षता हस्तांतरण में बाधा’ का आरोप लगाया। ट्रंप ने साउथ अफ्रीका को ‘G से बाहर’ करने की बात दोहराई।
दक्षिण अफ्रीका: विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला ने ट्रंप को ‘श्वेत वर्चस्व’ का समर्थक बताया। रामाफोसा ने कहा, “हम बहिष्कार से प्रभावित नहीं होंगे।”
अन्य: यूरोपीय संघ की उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने रामाफोसा का साथ दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तनाव 2026 G20 को प्रभावित करेगा।
यह विवाद G20 को ‘माइनर vs मेजर’ की जंग का अखाड़ा बना रहा। रामाफोसा ने समापन में कहा, “अफ्रीका की आवाज मजबूत हुई।” अधिक अपडेट के लिए G20 की आधिकारिक वेबसाइट या Reuters चेक करें।
