कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता की जंग चरम पर: सिद्धारमैया का बड़ा बयान, आलाकमान ही फैसला लेगा
कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता की जंग चरम पर: सिद्धारमैया का बड़ा बयान, आलाकमान ही फैसला लेगा
कर्नाटक की सियासत में इन दिनों मुख्यमंत्री पद को लेकर तनाव चरम पर है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शनिवार (22 नवंबर 2025) को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात के बाद एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “मैं या शिवकुमार, सभी को आलाकमान की बात माननी होगी। कैबिनेट फेरबदल या नेतृत्व परिवर्तन का फैसला केवल हाईकमान ही लेगा।” यह बयान उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थकों की दिल्ली लॉबिंग के बीच आया है, जहां वे 2023 के कथित ‘पावर-शेयरिंग फॉर्मूले’ (ढाई-ढाई साल) को लागू करने की मांग कर रहे हैं।
बयान का पूरा विवरण:
समय और संदर्भ: सिद्धारमैया ने बेंगलुरु में खरगे के आवास पर मुलाकात के बाद मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, “आलाकमान जो कहेगा, हम सभी उसका पालन करेंगे। मैं अपना पूरा पांच साल का कार्यकाल पूरा करूंगा और अगला बजट भी पेश करूंगा।” यह बयान सत्ता बदलाव की अटकलों को खारिज करने के लिए था, जो शिवकुमार गुट की सक्रियता से तेज हुई हैं।
पृष्ठभूमि: मई 2023 के विधानसभा चुनाव जीत के बाद सिद्धारमैया को सीएम बनाया गया था, लेकिन कथित तौर पर आलाकमान ने ढाई साल बाद शिवकुमार को सत्ता सौंपने का फॉर्मूला तय किया था। अब सिद्धारमैया के ढाई साल पूरे होने पर शिवकुमार समर्थक (करीब 10-20 विधायक) दिल्ली पहुंचे हैं, जहां वे खरगे से मिलकर दबाव बना रहे हैं।
डीके शिवकुमार की प्रतिक्रिया:
शिवकुमार ने सिद्धारमैया के बयान का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री ने अपने मन की बात कह दी। मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। हम सब मिलकर काम करेंगे। गुटबाजी मेरे खून में नहीं है।” हालांकि, उनके गुट के विधायकों ने दिल्ली में आलाकमान से मुलाकात की, जो साफ इशारा देता है कि तनाव अभी बरकरार है। शिवकुमार ने जोर दिया कि “सभी 140 विधायक मंत्री बनने लायक हैं” और कैबिनेट फेरबदल से सभी को हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
आलाकमान और पार्टी की भूमिका:
कांग्रेस हाईकमान (खरगे, राहुल गांधी) ने विधायकों को चेतावनी दी है कि गुटबाजी न करें। पार्टी सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल पर जल्द फैसला हो सकता है, लेकिन सीएम बदलाव की संभावना कम है।
सिद्धारमैया ने अटकलों को “बकवास” बताया और कहा कि कोई आधिकारिक निर्देश नहीं मिला है।
यह विवाद कर्नाटक कांग्रेस के लिए चुनौती बन गया है, खासकर जब राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव नजदीक हैं। विपक्षी भाजपा-जेडीएस गठबंधन इसे कमजोरी के रूप में उछाल रहा है। परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए, अधिक अपडेट के लिए आधिकारिक स्रोतों पर नजर रखें।
