उत्तराखंड कांग्रेस में बड़ा फेरबदल: गणेश गोदियाल ने प्रदेश मुख्यालय में फ्रंट ऑफिस रिस्ट्रक्चर किए, वरिष्ठ नेताओं को नए कमरे – 2027 चुनाव की रणनीति पर फोकस!
उत्तराखंड कांग्रेस में बड़ा फेरबदल: गणेश गोदियाल ने प्रदेश मुख्यालय में फ्रंट ऑफिस रिस्ट्रक्चर किए, वरिष्ठ नेताओं को नए कमरे – 2027 चुनाव की रणनीति पर फोकस!
उत्तराखंड कांग्रेस को नया जीवन देने की दिशा में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने हाल ही में पार्टी मुख्यालय (कांग्रेस भवन, देहरादून) में फ्रंट ऑफिस की संरचना में आमूल-चूल बदलाव कर दिए हैं। 22 नवंबर 2025 को शुरू हुई इस प्रक्रिया में वरिष्ठ नेताओं को सम्मानजनक जगहें आवंटित की गईं, नेम प्लेट्स लगाई गईं, और पार्टी की एकजुटता को प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया। गोदियाल ने कहा कि यह बदलाव 2027 विधानसभा चुनावों की रूपरेखा तैयार करने के लिए जरूरी हैं। प्रवक्ता शीशपाल बिष्ट के अनुसार, “अध्यक्ष जी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते। बड़े नेता मुख्यालय में नियमित बैठेंगे, तो गतिविधियां बढ़ेंगी और किला फतह होगा।” यह कदम नवंबर 2025 में हाईकमान द्वारा गोदियाल को दूसरी बार अध्यक्ष बनाने के बाद आया, जब पार्टी ने प्रीतम सिंह को प्रचार समिति और हरक सिंह रावत को चुनाव प्रबंधन समिति का जिम्मा सौंपा था।
फ्रंट ऑफिस में क्या बदला? वरिष्ठ नेताओं को स्पेस अलॉटमेंट
पहले कांग्रेस भवन में सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष और कार्यकारिणी पदाधिकारियों के लिए जगह थी, लेकिन अब सभी वरिष्ठ नेताओं को फ्रंट ऑफिस में स्थायी कमरे दिए गए हैं। मुख्य बदलाव:
सूर्यकांत धस्माना का पुराना कमरा: अब चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह का होगा। प्रीतम (पूर्व कैबिनेट मंत्री) को प्रचार रणनीति का जिम्मा मिला है, जो 2027 चुनावों के लिए अहम।
महिला कांग्रेस का ऑफिस: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, निवर्तमान अध्यक्ष करण माहरा (अब CWC विशेष सदस्य), नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और चुनाव प्रबंधन समिति अध्यक्ष हरक सिंह रावत (पूर्व मंत्री) के लिए आवंटित। हरक सिंह को जमीनी प्रबंधन का रोल मिला है।
महिला कांग्रेस को पुराना ऑफिस: पार्टी ने महिला विंग को उनका मूल स्थान वापस अलॉट किया, जो एकजुटता का संदेश देता है।
अन्य बदलाव: उपाध्यक्षों और महामंत्रियों को शिफ्ट किया जा रहा है, उनकी जिम्मेदारियां बढ़ाई गईं, और जवाबदेही तय की गई। फ्रंट ऑर्गनाइजेशन को नए स्पेस दिए जा रहे हैं।
सभी कमरों में नई नेम प्लेट्स लगाई गईं, जो नेताओं को सम्मान देती हैं। गोदियाल ने अपेक्षा जताई कि नेता नियमित आकर 2027 की रणनीति बनाएं।
बदलाव का मकसद: एकजुटता और 2027 चुनाव पर फोकस
यह रिस्ट्रक्चर पार्टी की लीडरशिप को एकजुट दिखाने का प्रयास है। गोदियाल (दूसरी बार अध्यक्ष, पहले 2021-22 में) ने कहा, “वरिष्ठ नेता मुख्यालय में बैठेंगे, तो युवा कार्यकर्ताओं को प्रेरणा मिलेगी।” यह कदम गुटबाजी कम करने और जातीय समीकरण (ब्राह्मण-ठाकुर दबदबा कम, दलित वोट शेयर बढ़ाने) पर आधारित लगता है। 2022 चुनाव में कांग्रेस की हार (32/70 सीटें) के बाद यह रिवैंप 2027 के लिए मजबूती का संकेत है।
पार्टी की उम्मीदें: क्या बदलेगा समीकरण?
फायदे: नियमित मीटिंग्स से रणनीति मजबूत, कार्यकर्ताओं में जोश। हरक-प्रीतम जैसे दिग्गजों का रोल पार्टी को जमीनी ताकत देगा।
चुनौतियां: BJP की मजबूत पकड़ (47/70 सीटें 2022 में) के सामने एकजुटता बनाए रखना।
आगे क्या?: गोदियाल ने दिल्ली दौरे पर हरीश रावत से मुलाकात की, जहां रणनीति पर चर्चा हुई। जिला स्तर पर 27 नए अध्यक्ष भी नियुक्त।
यह बदलाव उत्तराखंड कांग्रेस को नई ऊर्जा दे सकता है।
