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देश में आज से लागू हुए 4 नए लेबर कोड: महिलाओं को पुरुषों के बराबर सैलरी, रात की नौकरी का मौका

देश में आज से लागू हुए 4 नए लेबर कोड: महिलाओं को पुरुषों के बराबर सैलरी, रात की नौकरी का मौका

भारत की श्रमिक नीति में ऐतिहासिक बदलाव आ गया है। केंद्र सरकार ने आज से चार नए लेबर कोड लागू कर दिए हैं, जो 29 पुरानी श्रमिक कानूनों को समाहित करते हुए करोड़ों मजदूरों के लिए समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा और बेहतर कामकाजी हालात सुनिश्चित करेंगे। श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने एक्स पर पोस्ट कर इसे “हर मजदूर की गरिमा का गारंटी” बताया। खासकर महिलाओं के लिए यह कोड वरदान साबित होंगे, जहां समान काम के लिए समान वेतन (Equal Pay for Equal Work) अनिवार्य होगा, साथ ही रात की शिफ्ट और खतरनाक कामों में भागीदारी की छूट मिलेगी।

ये चार कोड हैं: वेज कोड (Code on Wages, 2019), इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (Industrial Relations Code, 2020), सोशल सिक्योरिटी कोड (Code on Social Security, 2020) और OSH कोड (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020)। इन्हें 2020 में संसद से पारित किया गया था, लेकिन राज्य स्तर पर नियम बनाने में देरी के कारण आज से पूर्ण रूप से लागू हो रहे हैं। सरकार का दावा है कि इससे रोजगार बढ़ेगा, उत्पादकता सुधरेगी और उद्योगों को लचीलापन मिलेगा। 2015 में 19% से बढ़कर 2025 में 64% श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा कवरेज मिल चुका है, और ये कोड इसे 40 करोड़ मजदूरों तक विस्तार देंगे।

महिलाओं के लिए प्रमुख लाभ:

समान वेतन: पुरुषों के बराबर सैलरी, जिसमें ट्रांसजेंडर को भी समान अधिकार। इससे लिंग आधारित वेतन अंतर खत्म होगा।

रात की शिफ्ट: महिलाओं को रात 7 बजे से सुबह 6 बजे तक काम करने की अनुमति, लेकिन उनकी सहमति और सुरक्षा उपायों (जैसे परिवहन, सीसीटीवी) के साथ।

खतरनाक काम: अंडरग्राउंड माइनिंग और भारी मशीनरी जैसे क्षेत्रों में प्रवेश, सुरक्षा सुनिश्चित कर।

ग्रिवांस कमिटी: हर प्रतिष्ठान में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अनिवार्य।

अन्य मजदूरों के लिए बदलाव:

न्यूनतम मजदूरी: सभी को समय पर न्यूनतम वेतन, बिना भेदभाव।

ग्रेच्युटी: एक साल की नौकरी के बाद फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉयी को भी ग्रेच्युटी।

सामाजिक सुरक्षा: गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और प्रवासी मजदूरों के लिए PF, पेंशन, ESIC कवरेज। डिजिटल एग्रीगेटर्स (जैसे उबर, जोमैटो) को योगदान देना होगा।

अपॉइंटमेंट लेटर: युवाओं को लिखित नियुक्ति पत्र अनिवार्य।

ओवरटाइम: टेक्सटाइल और एक्सपोर्ट सेक्टर में दोगुना वेतन; बकाया वेतन के लिए 3 साल तक दावा।

फैक्ट्री शिफ्ट: लंबी शिफ्ट की अनुमति, लेकिन लेऑफ के लिए 100 से बढ़ाकर 300 कर्मचारियों की थ्रेशोल्ड।

40 वर्ष से अधिक उम्र के मजदूरों को मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य जांच अनिवार्य होगी। ट्रेड यूनियनों ने विरोध जताया है, इसे “मजदूर अधिकारों पर हमला” बताते हुए। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महासचिव अमरजीत कौर ने कहा, “ये कोड फिक्स्ड-टर्म जॉब्स को बढ़ावा देकर स्थायी रोजगार छीनेंगे।” लेकिन सरकार इसे “आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में कदम मान रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि ये सुधार MSME, IT और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बूस्ट देंगे, लेकिन कार्यान्वयन पर नजर रहेगी। क्या ये कोड वाकई श्रमिकों की गरिमा लौटाएंगे? समय बताएगा।

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