सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सुझाव: लग्जरी पेट्रोल-डीजल कारों पर लगाम लगाकर EV क्रांति को गति दें!
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सुझाव: लग्जरी पेट्रोल-डीजल कारों पर लगाम लगाकर EV क्रांति को गति दें!
पर्यावरण संरक्षण और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक साहसिक कदम का सुझाव दिया है। गुरुवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि उच्च क्षमता वाले लग्जरी पेट्रोल और डीजल कारों पर चरणबद्ध प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जाए। जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस उज्जल भuyan की बेंच ने कहा कि यह कदम आम जनता पर असर नहीं डालेगा, क्योंकि ये कारें केवल एक छोटे अमीर वर्ग के लिए हैं।
कोर्ट ने टिप्पणी की, “अब बाजार में बड़े और प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारें उपलब्ध हैं, जो VIPs और कॉर्पोरेट्स द्वारा इस्तेमाल होने वाली गैस-गुजलर कारों जितनी ही सुविधाजनक हैं। उच्च क्षमता वाली पेट्रोल या डीजल कारों पर पहले प्रतिबंध लगाने का सोचें। इससे आम आदमी प्रभावित नहीं होगा, क्योंकि इन्हें बहुत कम लोग ही खरीद पाते हैं।” यह सुझाव राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान (NEMMP) की समीक्षा के दौरान आया, जो 2012 से चला आ रहा है। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरामणी ने बताया कि EV प्रोत्साहन में 13 मंत्रालय सक्रिय हैं और सरकार इस मुद्दे पर सजग है। कोर्ट ने चार हफ्तों में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
यह सुझाव वायु प्रदूषण की बढ़ती समस्या के बीच आया है, खासकर दिल्ली-एनसीआर में। कोर्ट का मानना है कि EV अपनाने से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर खुद बढ़ेगा। पेट्रोल पंपों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट हब पर चार्जिंग स्टेशन लगाना आसान होगा। बाजार के लिहाज से, लग्जरी EV सेगमेंट पहले से ही 12% बिक्री हासिल कर रहा है, जबकि मास मार्केट में यह 2-3% है। BMW और मर्सिडीज जैसी कंपनियां EV बिक्री में उछाल देख रही हैं।
लेकिन विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं। लग्जरी कार उद्योग ‘मेक इन इंडिया’ का बड़ा हिस्सा है, जो स्थानीय असेंबली, नौकरियां और सप्लाई चेन को बढ़ावा देता है। अचानक प्रतिबंध से निवेश प्रभावित हो सकता है। ऑटो इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि नीति को सावधानी से लागू करना जरूरी है, ताकि EV ट्रांजिशन तेज हो लेकिन अर्थव्यवस्था पर बोझ न पड़े।
इस सुझाव से लग्जरी कार बाजार में हलचल मच गई है। मर्सिडीज S-क्लास, BMW 7 सीरीज, ऑडी A8 जैसी पेट्रोल-डीजल कारें प्रभावित हो सकती हैं। वहीं, टेस्ला मॉडल S, Porsche Taycan और मर्सिडीज EQS जैसी EV विकल्पों को बढ़ावा मिलेगा। यदि लागू हुआ, तो यह भारत की ग्रीन मोबिलिटी को नई दिशा देगा। सरकार की अगली रिपोर्ट पर कोर्ट की नजर रहेगी। कुल मिलाकर, यह सुझाव EV क्रांति का प्रतीकात्मक लेकिन प्रभावी कदम साबित हो सकता है, जो पर्यावरण और नवाचार को जोड़ेगा।
