देहरादून में ट्रैफिक उल्लंघनों पर सख्ती: चालान 42% बढ़े, शराबी ड्राइवरों पर 274% और नाबालिग चालकों पर 666% कार्रवाई
देहरादून में ट्रैफिक उल्लंघनों पर सख्ती: चालान 42% बढ़े, शराबी ड्राइवरों पर 274% और नाबालिग चालकों पर 666% कार्रवाई
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में ट्रैफिक नियमों का पालन करने की बजाय उल्लंघन करने की होड़ सी लग गई है। शहर की बढ़ती यातायात समस्याओं को लेकर एडीजी अपराध एवं कानून व्यवस्था वी. मुरुगेशन ने बुधवार को जनपद के सभी राजपत्रित अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में खुलासा हुआ कि यातायात नियमों के उल्लंघन पर चालान 42.40 प्रतिशत बढ़ गए हैं। खासकर शराब पीकर वाहन चलाने वालों के चालान में 274 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि नाबालिग वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई 666 प्रतिशत बढ़ चुकी है। यह आंकड़े जनवरी से सितंबर 2025 तक के हैं, जो राज्य में सड़क हादसों में 4.42 प्रतिशत की वृद्धि को भी दर्शाते हैं।
एडीजी मुरुगेशन ने बैठक में साफ कहा कि शराबी ड्राइवरों और नाबालिग चालकों पर अब जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाई जाएगी। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि ड्रंक ड्राइविंग केसों में तत्काल गिरफ्तारी और लाइसेंस सस्पेंड किया जाए। मुरुगेशन ने कहा, “देहरादून जैसे शहरों में ट्रैफिक जाम और हादसे बढ़ रहे हैं। फोर्स की कमी के बावजूद सख्ती जरूरी है।” बैठक में यह भी सामने आया कि 2017 से अब तक जुलूस, रैलियां, धरना-प्रदर्शन, मेले और त्योहारों के आयोजनों में तेजी आई है, जिससे फोर्स की कमी और गंभीर हो गई है। देहरादून जिले के नगर क्षेत्र में लगभग 12 लाख वाहन रजिस्टर्ड हैं, जो सड़कों पर लगातार दबाव बनाए रखते हैं।
यातायात संभालने के लिए सिपाहियों की भारी कमी बताई गई। वर्तमान में देहरादून में ट्रैफिक पुलिस में केवल 5 इंस्पेक्टर, 5 सब-इंस्पेक्टर, 7 एडिशनल एसआई, 9 हेड कांस्टेबल, 79 कांस्टेबल, 44 महिला कांस्टेबल और 96 होम गार्ड हैं। जबकि आदर्श संख्या लगभग दोगुनी होनी चाहिए। एडीजी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फोर्स की कमी को पूरा करने के लिए होम गार्ड्स और अन्य विभागों से सहायता ली जाए। साथ ही, पेंडिंग केसों को क्लियर करने और ट्रैफिक प्लानिंग पर जोर दिया। मुरुगेशन ने कहा कि राज्य के सात जिलों, जिसमें देहरादून शामिल है, में हादसे, मौतें और चोटें पिछले साल से ज्यादा हुई हैं।
यह बैठक देहरादून की ट्रैफिक समस्याओं को हल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। शहर में पार्किंग उल्लंघनों (11,382 चालान) और अवैध पार्किंग पर क्रेन एक्शन (11,864) सबसे ज्यादा हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और वाहनों की बढ़ती संख्या से समस्या गंभीर हो रही है। 2017 के मोबिलिटी स्टडी के अनुसार, ट्रैफिक वॉल्यूम इंफ्रास्ट्रक्चर से तीन गुना ज्यादा है। मुरुगेशन ने साइबर सिक्योरिटी और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग पर भी फोकस किया, ताकि भड़काऊ कंटेंट से कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।
नागरिकों ने स्वागत किया है, लेकिन फोर्स बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “ट्रैफिक जाम रोज की समस्या है, सख्ती तो ठीक लेकिन सिपाही कहां हैं?” क्या एडीजी के निर्देशों से देहरादून की सड़कें सुरक्षित होंगी? प्रशासन की नजरें अब अमल पर टिकी हैं।
