उत्तराखंड में रजिस्ट्री शुल्क दोगुना: जमीन-घर खरीदना महंगा, आम जनता में उबाल – सरकार बोली, अन्य राज्यों से अभी भी सस्ता
उत्तराखंड में रजिस्ट्री शुल्क दोगुना: जमीन-घर खरीदना महंगा, आम जनता में उबाल – सरकार बोली, अन्य राज्यों से अभी भी सस्ता
उत्तराखंड सरकार के ताजा फैसले ने रियल एस्टेट बाजार में हलचल मचा दी है। राज्य में प्रॉपर्टी रजिस्ट्री शुल्क को 25,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया गया है, जिससे घर, जमीन या फ्लैट खरीदना अब पहले से दोगुना महंगा हो गया। यह अधिसूचना वित्त सचिव दिलीप जावलकर द्वारा जारी की गई, और सोमवार शाम को ही सभी जिलों में लागू कर दी गई। पहाड़ी शहरों जैसे देहरादून, नैनीताल, मसूरी, अल्मोड़ा, रानीखेत और कोटद्वार में संपत्ति खरीदारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ने से आम जनता में नाराजगी की लहर दौड़ गई है।
असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन अतुल कुमार शर्मा ने सफाई दी कि नई फीस के बावजूद उत्तराखंड में रजिस्ट्री शुल्क अन्य राज्यों से कम है। उन्होंने उदाहरण दिया कि उत्तर प्रदेश में रजिस्ट्री फीस संपत्ति मूल्य का 1% है, बिना अधिकतम सीमा के। यानी 10 लाख की प्रॉपर्टी पर 10,000 रुपये, लेकिन 1 करोड़ की पर 1 लाख रुपये लगेंगे। जबकि उत्तराखंड में अब भी कैप्ड 50,000 रुपये है। शर्मा ने कहा, “यह फीस स्टांप विभाग के विभिन्न कार्यों के लिए इस्तेमाल होगी। 2015 से यह राशि अपरिवर्तित थी, अब संशोधन जरूरी हो गया।” लेकिन खरीदारों का कहना है कि यह बढ़ोतरी महंगाई के दौर में पीड़ित करने वाली है।
नई फीस तत्काल प्रभाव से लागू है। पहले, रजिस्ट्री शुल्क संपत्ति मूल्य का 2% या अधिकतम 25,000 रुपये, जो भी कम हो, था। अब यह 50,000 रुपये तक पहुंच गया। स्टांप ड्यूटी पर कोई बदलाव नहीं – पुरुष खरीदारों के लिए 5%, महिलाओं के लिए 3.75% और संयुक्त खरीद पर 4.37%। उदाहरण के तौर पर, देहरादून में 50 लाख की प्रॉपर्टी खरीदने पर पुरुष को स्टांप ड्यूटी के अलावा अब 50,000 रुपये रजिस्ट्री फीस देनी पड़ेगी, जो पहले 25,000 थी। रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि यह फैसला प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन को 10-15% महंगा कर देगा, खासकर मध्यम वर्ग के लिए।
आम जनता की नाराजगी सड़कों पर उतर आई। देहरादून के एक प्रॉपर्टी डीलर ने कहा, “लोग पहले से ही महंगाई से जूझ रहे हैं, ऊपर से यह बोझ। सरकार को सोचना चाहिए था।” सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, “पहाड़ी इलाके में जमीन खरीदना और महंगा? पर्यटन बढ़ाने की बातें तो ठीक, लेकिन आम आदमी का क्या?” विपक्षी नेता हरिश रावत ने इसे ‘धामी सरकार का काला कानून’ बताया और विधानसभा सत्र में बहस की मांग की। वहीं, सरकार ने कहा कि यह कदम राजस्व बढ़ाने और विभागीय सुधारों के लिए है।
यह बढ़ोतरी उत्तराखंड के रियल एस्टेट बाजार को प्रभावित कर सकती है, जहां पर्यटन और निवेश बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे काला धन कम होगा, लेकिन छोटे खरीदारों पर असर पड़ेगा। क्या सरकार फीस कम करने पर विचार करेगी? जनता की नाराजगी के बीच नजरें अब अगले कदम पर टिकी हैं।
