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बांग्लादेश बॉर्डर पर हाहाकार: SIR के डर से बंगाल से भाग रही अवैध प्रवासियों की भीड़!

बांग्लादेश बॉर्डर पर हाहाकार: SIR के डर से बंगाल से भाग रही अवैध प्रवासियों की भीड़!

भारत-बांग्लादेश सीमा पर उत्तर 24 परगना और मालदा जिले के खंडहर इलाकों में हड़कंप मच गया है। चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ड्राइव के साइड इफेक्ट के रूप में हजारों अवैध बांग्लादेशी प्रवासी पश्चिम बंगाल से भागने की कोशिश कर रहे हैं। बीएसएफ ने हकीमपुर चेकपोस्ट पर 500 से ज्यादा पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को रोका, जो बिना पासपोर्ट या दस्तावेज के सीमा पार करना चाहते थे। यह रिवर्स माइग्रेशन पिछले दो हफ्तों में “क्वांटम जंप” की तरह बढ़ गई है, और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।

बीएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “SIR और पुलिस वेरिफिकेशन ड्राइव से लंबे समय से अवैध रूप से रह रहे प्रवासी घबरा गए हैं। कई सालों से बिना कागजात के मजदूरी, घरेलू काम या कंस्ट्रक्शन में लगे लोग अब घर लौटने की होड़ में हैं।” हकीमपुर के ताराली बॉर्डर पर 18 नवंबर को 94 प्रवासियों को पकड़ा गया, जबकि सोमवार को 500 का बड़ा जत्था पकड़ा गया। ये ज्यादातर बिराटी, माध्यमग्राम, राजारहाट, न्यू टाउन और सॉल्टलेक के इलाकों से आए थे। एक प्रवासी ने कहा, “SIR में दस्तावेज चेक हो रहे हैं, गिरफ्तारी का डर है। इसलिए वापस लौट रहे हैं।”

SIR क्या है? चुनाव आयोग ने 4 नवंबर से 12 राज्यों में शुरू की गई यह कवायद वोटर लिस्ट को साफ करने के लिए है। BLOs को फॉर्म वेरिफाई करने और डिजिटल एंट्री का काम सौंपा गया है। लेकिन बंगाल में अवैध प्रवासियों ने इसे खतरे के रूप में लिया। कई बांग्लादेशी सालों से फर्जी वोटर आईडी बनाकर रहते थे, अब पकड़े जाने का डर सताने लगा। बीएसएफ ने कहा कि ये लोग बिना दस्तावेज के नदियों या अनफेंस्ड इलाकों से पार करने की कोशिश कर रहे हैं। अगर BGB (बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश) स्वीकार करता है, तो पुश बैक किया जाता है, वरना बायोमेट्रिक चेक और पूछताछ होती है।

सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ी है। एक अधिकारी ने कहा, “ये सिर्फ मजदूर नहीं हो सकते। अपराधी या आतंकी तत्व भी मौके का फायदा उठा सकते हैं।” पिछले साल बांग्लादेश में अवामी लीग सरकार गिरने के बाद घुसपैठ बढ़ी थी, लेकिन अब रिवर्स ट्रेंड है। जनवरी से चली अवैध निवासियों के खिलाफ कैंपेन ने भी घबराहट बढ़ाई। कुछ बंगाली बोलने वाले भारतीय नागरिकों को गलती से “बांग्लादेशी” मानकर पुश बैक करने की घटनाओं ने डर और बढ़ा दिया।

विपक्षी नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा, “SIR अच्छा है, लेकिन अवैध प्रवासियों की पहचान में निर्दोष प्रभावित न हों।” बीजेपी ने इसे “मोदी सरकार की सख्ती का नतीजा” बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बॉर्डर सिक्योरिटी मजबूत होगी, लेकिन मानवीय पहलू पर ध्यान देना जरूरी। फिलहाल, बीएसएफ ने 143वीं बटालियन की तैनाती बढ़ा दी है। क्या यह SIR का अप्रत्याशित साइड इफेक्ट है या अवैध घुसपैठ पर लगाम? समय बताएगा!

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