मोहन सरकार का किसान हितैषी फैसला: उज्जैन सिंहस्थ 2028 के लिए लैंड पूलिंग योजना निरस्त, विरोध के बाद पीछे हटे कदम
मोहन सरकार का किसान हितैषी फैसला: उज्जैन सिंहस्थ 2028 के लिए लैंड पूलिंग योजना निरस्त, विरोध के बाद पीछे हटे कदम
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने उज्जैन सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के लिए प्रस्तावित लैंड पूलिंग योजना को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। यह निर्णय किसानों के लंबे समय से चले आ रहे विरोध और भारतीय किसान संघ के प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन से ठीक एक दिन पहले लिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर किसान संगठनों, भाजपा पदाधिकारियों और उज्जैन जिला प्रशासन के साथ बैठक की, जहां चर्चा के बाद योजना को रद्द करने का ऐलान किया। सीएम ने कहा, “किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए हमने यह कदम उठाया। सरकार सभी को साथ लेकर चलेगी, किसी को नाराज नहीं करेंगे।”
योजना का विवाद और किसानों का विरोध
उज्जैन सिंहस्थ 2028 के लिए करीब 2,378 हेक्टेयर जमीन की जरूरत बताई गई थी, जिसमें से 1,806 किसानों की भूमि लैंड पूलिंग के दायरे में आ रही थी। योजना के तहत 50% जमीन सरकार को सौंपने पर किसानों को विकसित प्लॉट मिलने का वादा था, लेकिन किसानों ने इसे ‘जमीन छीनने की साजिश’ बताया। उनका कहना था कि बिना पर्याप्त मुआवजे के पुश्तैनी खेत खोना अस्वीकार्य है। सितंबर से ही उज्जैन, जबलपुर और भोपाल में ट्रैक्टर रैलियां, धरना-प्रदर्शन हो रहे थे। भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने कहा था, “सिंहस्थ के नाम पर कंक्रीट बिछाकर खेत बर्बाद नहीं होने देंगे।” केंद्र सरकार और भाजपा आलाकमान ने भी योजना पर सवाल उठाए थे, जिससे दबाव बढ़ा।
बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत कैटेल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, किसान संघ के महेश चौधरी, कमल सिंह आंजना समेत कई नेता शामिल हुए। सीएम ने नगरीय प्रशासन विकास विभाग और जिला प्रशासन को तत्काल आदेश जारी करने के निर्देश दिए।
आगे की योजना: सिंहस्थ की तैयारी बरकरार
फैसले का स्वागत करते हुए किसान नेता लक्ष्मी नारायण पटेल ने कहा, “यह किसान हित की जीत है। हम सिंहस्थ के लिए परंपरागत सहयोग को तैयार हैं, लेकिन जबरन अधिग्रहण नहीं।”af759e सरकार ने स्पष्ट किया कि सिंहस्थ की तैयारियां रुकेंगी नहीं। वैकल्पिक जमीन अधिग्रहण, मुख्य सड़कों और सार्वजनिक सुविधाओं पर फोकस होगा। नवंबर की शुरुआत में ही नीति में बदलाव कर लिखित मंजूरी अनिवार्य की गई थी, जो अब निरस्ती से मजबूत हो गई। सीएम ने जोर दिया कि करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए उच्च स्तरीय सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी, लेकिन किसानों के हितों का पूरा ख्याल रखा जाएगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
विपक्ष ने फैसले का स्वागत किया, लेकिन कांग्रेस ने तंज कसा, “किसान आंदोलन के दबाव में ही सरकार झुकी।” भाजपा ने इसे ‘लोकतांत्रिक संवाद’ की मिसाल बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय 2028 सिंहस्थ को विवादमुक्त बनाने में मदद करेगा, जो मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर है। फिलहाल, उज्जैन में शांति है, लेकिन सरकार वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर काम तेज करेगी।
