साल का आखिरी सोम प्रदोष व्रत आज: शिव पूजा मुहूर्त सिर्फ 2 घंटे 40 मिनट, विधि-मंत्र-लाभ जानें
साल का आखिरी सोम प्रदोष व्रत आज: शिव पूजा मुहूर्त सिर्फ 2 घंटे 40 मिनट, विधि-मंत्र-लाभ जानें
हिंदू पंचांग के अनुसार, आज 17 नवंबर 2025 को सोम प्रदोष व्रत है – मार्गशीर्ष मास का कृष्ण पक्ष त्रयोदशी पर आधारित यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है। सोमवार का संयोग होने से इसे सोम प्रदोष कहा जाता है, जो वर्ष 2025 का आखिरी सोम प्रदोष है। ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन शिव पूजा का मुहूर्त शाम 5:27 बजे से रात 8:07 बजे तक (केवल 2 घंटे 40 मिनट) रहेगा। प्रदोष काल में रुद्राभिषेक, बेलपत्र चढ़ाना और महामृत्युंजय मंत्र जाप से पाप नाश, स्वास्थ्य लाभ और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। पंडित मनोज तिवारी कहते हैं, “यह व्रत शिव कृपा का अंतिम द्वार है, जीवन की बाधाएं दूर होंगी।”
प्रदोष मुहूर्त (17 नवंबर 2025, दिल्ली समय)
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: सुबह 4:47 बजे (16 नवंबर से)
त्रयोदशी तिथि समाप्त: अगले दिन सुबह 7:12 बजे
शिव पूजा मुहूर्त: शाम 5:27 से 8:07 बजे (2 घंटे 40 मिनट) – सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल।
सूर्यास्त: शाम 5:30 बजे के आसपास।
राहुकाल (परहेज): दोपहर 1:30 से 3:00 बजे।
अन्य शहरों में मुहूर्त ±10-15 मिनट भिन्न हो सकता है। उदया तिथि के अनुसार व्रत कल ही रखें।
सोम प्रदोष व्रत विधि (स्टेप-बाय-स्टेप)
सुबह स्नान कर सफेद/नीले वस्त्र धारण करें। शिव मंदिर जाएं या घर में शिवलिंग स्थापित करें।
उपवास: फलाहार या एक समय सात्विक भोजन (दूध, फल, साबूदाना)।
शाम मुहूर्त में पूजा:
शिवलिंग को दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल से स्नान (रुद्राभिषेक) कराएं।
बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, अक्षत, बिल्वपुष्प चढ़ाएं।
दीपक-धूप जलाएं, शिव चालीसा या प्रदोष स्तोत्र का पाठ करें।
उत्तर-पूर्व दिशा में मुख कर ॐ नमः शिवाय मंत्र से अभिषेक।
आरती और कथा: प्रदोष कथा सुनें, आरती करें।
समापन: प्रसाद (खीर, बेल) वितरित करें।
सोम प्रदोष में शिव-पार्वती की जोड़ी पूजा विशेष फलदायी।
महत्वपूर्ण मंत्र (108 बार जाप)
महामृत्युंजय मंत्र:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् | उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ||
(मृत्यु भय, रोग नाश।)
सोम प्रदोष मंत्र:
ॐ नमः शिवाय सोमाय प्रदोषाय नमः |
(सोमवार संयोग से चंद्र दोष शांति।)
मंत्र जाप से शिव कृपा प्राप्ति।
व्रत के लाभ (ज्योतिषीय दृष्टि)
स्वास्थ्य-सुख: रोग, नेत्र विकार, मानसिक तनाव दूर; वैवाहिक जीवन सुखमय।
आर्थिक: धन प्राप्ति, व्यापार-नौकरी में उन्नति।
कुंडली: चंद्र-शिव दोष निवारण, संतान सुख।
विशेष: मार्गशीर्ष मास में व्रत से पुण्य कई गुना बढ़ता है।
सावधानियां और नियम
उपवास: सख्ती से फलाहार; रोगी दूधाहार कर सकते हैं।
दान: सफेद वस्त्र, चावल, दूध, बेलपत्र दान करें।
परहेज: क्रोध, तामसिक भोजन, काले वस्त्र। प्रदोष काल में पूजा अनिवार्य।
आज से शुरू करें – सोम प्रदोष की कृपा से नया वर्ष सुखमय बनेगा!
