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लोकतंत्र बहाल होने पर ही लौटूंगी: भारत में शरण लिए शेख हसीना का पहला बयान

लोकतंत्र बहाल होने पर ही लौटूंगी: भारत में शरण लिए शेख हसीना का पहला बयान

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 15 महीने बाद पहली बार सार्वजनिक बयान जारी कर अपनी वापसी की शर्तें स्पष्ट कीं। भारत में निर्वासन जीवन बिता रही हसीना ने कहा, “मैं बांग्लादेश लौटना चाहती हूं, लेकिन केवल तभी जब वहां लोकतंत्र पूरी तरह बहाल हो, अवामी लीग पर लगा प्रतिबंध हटे और सभी दलों के लिए निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो।”

इंडिया टुडे ग्लोबल को दिए विशेष साक्षात्कार में हसीना ने वर्तमान अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने मुहम्मद यूनुस की सरकार को “अलोकतांत्रिक और चरमपंथी समर्थित” बताया, जो देश को अराजकता की ओर ले जा रहा है। “मैंने 5 अगस्त 2024 को इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि जान बचाने के लिए देश छोड़ा। यह मेरी हार नहीं, बल्कि बांग्लादेश के भविष्य की चिंता थी,” हसीना ने कहा।

उन्होंने फरवरी 2026 में प्रस्तावित चुनावों में अवामी लीग की भागीदारी को अनिवार्य बताया। “बिना अवामी लीग के कोई चुनाव वैध नहीं होगा। मेरी पार्टी को बाहर रखना लोकतंत्र का मखौल है,” उन्होंने जोर दिया। हसीना ने यूनुस सरकार पर हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, अवामी लीग कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियां और कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त करने का आरोप लगाया।

हसीना ने भारत सरकार का आभार जताते हुए कहा, “भारत ने मुझे शरण देकर मेरे जीवन की रक्षा की। मैं भारत-बांग्लादेश संबंधों को हमेशा मजबूत बनाए रखूंगी।” उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि बांग्लादेश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए दबाव बनाया जाए।

हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने भी पुष्टि की कि उनकी मां चुनाव की घोषणा होते ही लौटने को तैयार हैं। अवामी लीग के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि हसीना की वापसी पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार करेगी।

बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के बीच हसीना का यह बयान नई बहस छेड़ सकता है। क्या यूनुस सरकार उनकी शर्तें मानेगी? या हसीना की वापसी बांग्लादेश में नया राजनीतिक भूचाल लाएगी? आने वाले दिन इसका जवाब देंगे।

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