बिहार: लालू फैमिली में खलबली! बेटा के बाद अब बेटी रोहिणी ने तोड़ा परिवार से रिश्ता
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की करारी हार ने न सिर्फ महागठबंधन को झकझोर दिया है, बल्कि लालू प्रसाद यादव के परिवार में भी भूचाल ला दिया है। शुक्रवार को आए नतीजों के महज एक दिन बाद, लालू की छोटी बेटी रोहिणी आचार्य ने राजनीति से संन्यास लेने और परिवार से नाता तोड़ने का ऐलान कर सबको स्तब्ध कर दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक भावुक पोस्ट में रोहिणी ने लिखा, “मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं। संजय यादव और रमीज ने मुझसे यही करने को कहा था… और मैं सारा दोष अपने ऊपर ले रही हूं।”
यह घोषणा आरजेडी के लिए एक और झटका साबित हुई है। चुनाव परिणामों के अनुसार, आरजेडी को मात्र 25 सीटें मिलीं, जबकि एनडीए ने 140 से अधिक सीटों पर कब्जा जमाया। महागठबंधन की यह हार पहले से ही पार्टी में आंतरिक कलह को जन्म दे चुकी थी। रोहिणी, जो डॉक्टर पृष्ठभूमि से हैं और 2022 में अपने पिता लालू को किडनी दान करने के लिए चर्चा में रहीं, ने 2024 के लोकसभा चुनाव में सारण सीट से आरजेडी की ओर से उम्मीदवारी लड़ी थी, लेकिन भाजपा के राजीव प्रताप रूड़ी से हार गईं।
रोहिणी का यह कदम परिवारिक फूट को और गहरा करता नजर आ रहा है। कुछ महीने पहले लालू ने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को निजी जीवन के विवादों के कारण पार्टी से निष्कासित कर दिया था। अब रोहिणी का फैसला तेज प्रताप की बगावत की याद दिला रहा है। पोस्ट में रोहिणी ने तेजस्वी यादव के करीबी सलाहकार राज्यसभा सांसद संजय यादव और उनके पुराने दोस्त रमीज (उत्तर प्रदेश के एक राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले) पर निशाना साधा। संजय यादव को पार्टी में टिकट वितरण और आंतरिक फैसलों में हस्तक्षेप के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। रोहिणी ने चुनाव से पहले ही सोशल मीडिया पर परिवार और पार्टी के अकाउंट्स को अनफॉलो कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना आरजेडी की आंतरिक कलह को उजागर करती है। भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने तंज कसते हुए कहा, “रोहिणी ने लालू को किडनी दान की, लेकिन परिवार में एक-दो लोगों के कारण सब बिखर रहा है।” वहीं, आरजेडी सूत्रों के अनुसार, लालू और राबड़ी देवी ने अभी तक तेजस्वी पर संजय यादव के खिलाफ कार्रवाई का दबाव नहीं डाला है, जो रोहिणी की नाराजगी का कारण बन सकता है।
रोहिणी का यह बयान सिंगापुर में रह रहे उनके पति समीर आलम के साथ निजी जीवन पर लौटने का संकेत देता है। हालांकि, यह पोस्ट भावनात्मक दबाव का परिणाम माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य परिवार को एकजुट करने का हो सकता है। बिहार की सियासत में ‘जंगल राज’ के आरोपों के बीच यह परिवारिक संकट विपक्ष को नई गोला-बारूद दे रहा है। क्या यह आरजेडी के पुनर्निर्माण का संकेत है या परिवार का स्थायी विघटन? आने वाले दिनों में इसका असर साफ होगा। फिलहाल, लालू परिवार की यह ‘महाभारत’ बिहार की राजनीति का नया अध्याय बन चुकी है।
