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Saturday Worship: शनिवार के दिन किन देवी-देवताओं की होती है पूजा? – जानें विधि, मंत्र और लाभ

Saturday Worship: शनिवार के दिन किन देवी-देवताओं की होती है पूजा? – जानें विधि, मंत्र और लाभ

शनिवार का दिन भगवान शनिदेव को समर्पित होता है, लेकिन इस दिन हनुमान जी, काल भैरव, संतान गोपाल और माता दुर्गा के नौवें रूप सिद्धिदात्री की पूजा भी विशेष फलदायी मानी जाती है। आइए जानते हैं किसकी पूजा कैसे करें, कौन-से मंत्र जपें और क्या मिलेगा लाभ।

1. भगवान शनिदेव (Shani Dev)

क्यों पूजें? कुंडली में शनि दोष, साढ़ेसाती या ढैय्या से मुक्ति के लिए।

पूजा विधि:

सुबह स्नान कर काले वस्त्र पहनें।

शनि मंदिर या घर में शनि यंत्र स्थापित करें।

सरसों का तेल, काले तिल, काला कपड़ा चढ़ाएं।

शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों तेल का दीपक जलाएं।

मंत्र:

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

लाभ: नौकरी-व्यवसाय में स्थिरता, रोगों से रक्षा, शत्रु भय दूर।

2. हनुमान जी (Bajrang Bali)

क्यों पूजें? शनि की कुदृष्टि से बचाव और बल-बुद्धि के लिए।

पूजा विधि:

हनुमान चालीसा का 7 बार पाठ।

चोला चढ़ाएं, सिंदूर-चमेली का तेल अर्पित करें।

गुड़-चने का प्रसाद बांटें।

मंत्र:

ॐ हं हनुमते नमः

लाभ: भय मुक्त जीवन, आत्मविश्वास में वृद्धि, शनि पीड़ा शांत।

3. काल भैरव (Kaala Bhairav)

क्यों पूजें? तंत्र-मंत्र बाधा, भूत-प्रेत दोष निवारण।

पूजा विधि:

काले कुत्ते को रोटी खिलाएं।

सरसों तेल का दीपक, उड़द की दाल चढ़ाएं।

भैरव चालीसा या अष्टकम का पाठ।

मंत्र:

ॐ भं भैरवाय नमः

लाभ: अदृश्य शक्तियों से सुरक्षा, मुकदमों में विजय।

4. संतान गोपाल (Santana Gopal)

क्यों पूजें? संतान प्राप्ति या संतान सुख के लिए।

पूजा विधि:

गोपाल सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ।

दूध-मिश्री का भोग, तुलसी पत्र चढ़ाएं।

मंत्र:

ॐ देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते।

देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः॥

लाभ: संतान प्राप्ति, गर्भ रक्षा, पारिवारिक सुख।

5. माता सिद्धिदात्री (Navdurga 9th Form)

क्यों पूजें? नवरात्रि के अंतिम दिन, सभी सिद्धियां प्राप्ति हेतु।

पूजा विधि:

नवमी तिथि पर विशेष पूजा।

तिल, फल, मिठाई चढ़ाएं।

दुर्गा सप्तशती का पाठ।

मंत्र:

ॐ सिद्धिदात्री देव्यै नमः

लाभ: इच्छित कार्य सिद्धि, आध्यात्मिक उन्नति।

विशेष टिप:

शनिवार को लोहा, काला कपड़ा, तिल दान करने से शनि प्रसन्न होते हैं। मांस-मदिरा, झूठ से बचें।

पूजा से पहले पंडित जी से सलाह अवश्य लें।

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