जेकेई उपचुनाव: उमर अब्दुल्ला को दोगुना झटका, बीजेपी ने नागरोटा पर कब्जा, पीडीपी ने छीना बुदगाम
जेकेई उपचुनाव: उमर अब्दुल्ला को दोगुना झटका, बीजेपी ने नागरोटा पर कब्जा, पीडीपी ने छीना बुदगाम
जम्मू-कश्मीर के उपचुनाव नतीजों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) को बड़ा झटका दिया है। दोनों सीटों—नागरोटा और बुदगाम—पर सत्ताधारी दल हार गया, जबकि बीजेपी और पीडीपी को फायदा हुआ। नागरोटा में बीजेपी की देवयानी राणा ने शानदार जीत दर्ज की, वहीं बुदगाम में पीडीपी के आगा सैयद मुन्ताजिर मेहदी ने एनसी के उम्मीदवार को करारी शिकस्त दी।
नागरोटा में बीजेपी की धमाकेदार जीत:
जम्मू क्षेत्र की नागरोटा विधानसभा सीट पर बीजेपी की देवयानी राणा ने 42,350 वोट हासिल कर 24,647 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की। एनसी की शमीम बेगम और जेकेएनपीपी के हर्ष देव सिंह मुख्य प्रतिद्वंद्वी थे। यह सीट बीजेपी के दिवंगत विधायक देवेंद्र सिंह राणा के निधन के बाद खाली हुई थी, और देवयानी उनकी बेटी हैं। मतदान 11 नवंबर को 75% से अधिक वोटिंग के साथ हुआ। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बीजेपी की जम्मू में मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
बुदगाम में पीडीपी की वापसी:
केंद्रीय कश्मीर की बुदगाम सीट पर पीडीपी के आगा सैयद मुन्ताजिर मेहदी ने 21,576 वोटों के साथ 4,478 वोटों के मार्जिन से एनसी के आगा सैयद महमूद को हराया। यह सीट मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने खुद खाली की थी, जो 2024 विधानसभा चुनाव में गंदेरबल और बुदगाम दोनों से जीते थे, लेकिन परिवार का गढ़ गंदेरबल चुन लिया। 17 उम्मीदवारों के बीच शिया समुदाय के दो नेताओं के बीच मुकाबला था। वोटिंग 50.02% रही, और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने जीत पर बधाई दी।
उमर सरकार के लिए खतरे की घंटी?
एनसी को दोनों सीटों पर हार मिलने से उमर अब्दुल्ला सरकार पर सवाल खड़े हो गए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह उनकी एक साल पुरानी सरकार के प्रदर्शन पर जनता का असंतोष दिखाता है। एनसी नेतृत्व अब आंतरिक समीक्षा में जुटा है, जबकि बीजेपी और पीडीपी को यह नतीजे भविष्य के चुनावों के लिए उत्साहजनक लग रहे हैं। बुदगाम में पीडीपी की जीत को कश्मीर घाटी में उनकी वापसी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
ये नतीजे न केवल जेकेई की राजनीति को प्रभावित करेंगे, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों की दिशा भी तय कर सकते हैं।
