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98 की उम्र में एक्ट्रेस कामिनी कौशल का हुआ निधन, आमिर की ‘लाल सिंह चड्ढा’ में दिखीं आखिरी बार

98 की उम्र में एक्ट्रेस कामिनी कौशल का हुआ निधन, आमिर की ‘लाल सिंह चड्ढा’ में दिखीं आखिरी बार

हिंदी सिनेमा की स्वर्ण युग की आखिरी कड़ी मानी जाने वाली दिग्गज अभिनेत्री कामिनी कौशल का आज निधन हो गया। 98 वर्ष की उम्र में मुंबई के अपने आवास पर ली गई आखिरी सांसों ने पूरे बॉलीवुड को शोक की लहर में डुबो दिया। कामिनी कौशल, जिन्हें उमा कश्यप के नाम से भी जाना जाता था, ने सात दशकों से ज्यादा लंबे करियर में 90 से अधिक फिल्मों में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनकी आखिरी फिल्म आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’ (2022) थी, जहां उन्होंने एक छोटी लेकिन यादगार भूमिका निभाई। परिवार ने उनकी मृत्यु की पुष्टि की, लेकिन गोपनीयता बनाए रखने की अपील की है।

कामिनी कौशल का सफर: नीचा नगर से लाल सिंह चड्ढा तक

कामिनी कौशल का जन्म 24 फरवरी 1927 को लाहौर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। एक ब्राह्मण परिवार में पली-बढ़ीं कामिनी ने 1946 में चेतन आनंद की ‘नीचा नगर’ से डेब्यू किया, जो भारत की पहली अंतरराष्ट्रीय सुपरहिट साबित हुई। इस फिल्म ने कांस फिल्म फेस्टिवल में पाल्म डी’ओर (गोल्डन पाम) जीता—भारतीय सिनेमा का पहला ऐसा सम्मान।

प्रारंभिक सफलता: 1940-50 के दशक में उन्होंने ‘दो भाई’ (1947), ‘नदिया के पार’ (1948), ‘शबनम’ (1949), ‘परस’ (1949), ‘अरzoo’ (1950) जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में लीड रोल किए। दिलीप कुमार, राज कपूर, देव आनंद और अशोक कुमार जैसे सितारों के साथ उनकी जोड़ी हिट रही। लता मंगेशकर ने पहली बार किसी लीड हीरोइन के लिए ‘जिद्दी’ (1948) में गाया था—वो कामिनी के लिए ही था।

चरित्र भूमिकाओं का दौर: 1960 के दशक से उन्होंने मातृभूमि भूमिकाओं में उत्कृष्टता दिखाई, जैसे मनोज कुमार की ‘शहीद’ (1965), ‘दो रास्ते’ (1969), ‘अन्होनी’ (1973) और ‘प्रेम नगर’ (1974)। धर्मेंद्र के साथ चार फिल्मों—’आदमी और इंसान’, ‘यकीन’, ‘खुदा कसम’ और ‘इश्क पर जोर नहीं’—में काम किया, जहां वे उनकी पहली को-स्टार थीं।

टीवी और बाद के वर्ष: 1980-90 के दशक में टीवी सीरियल्स जैसे ‘महाभारत’ (कुंती की भूमिका) और ‘चंद्रकांता’ में नजर आईं। 2010 के बाद ‘कबीर सिंह’ (2019) और ‘लाल सिंह चड्ढा’ में स्पेशल अपीयरेंस दिया। 60वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में जया बच्चन से लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड लिया। वे फिल्मफेयर मैगजीन की पहली कवर गर्ल भी थीं।

कामिनी ने हमेशा निजी जीवन को गोपनीय रखा। 1948 में अपनी बहन ऊषा की कार दुर्घटना में मौत के बाद उन्होंने बहनोई बी.एस. सूद से शादी की और उनकी बेटियों को पाला। उनके तीन बेटे—राहुल, विदुर और श्रवण—हैं। उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद वे सक्रिय रहीं।

बॉलीवुड का शोक: ‘एक युग का अंत’

कामिनी के निधन पर सितारों ने श्रद्धांजलि दी। आमिर खान ने कहा, “कामिनी जी मेरी फिल्म में आखिरी बार नजर आईं। उनकी गरिमा और टैलेंट हमेशा याद रहेगा।” धर्मेंद्र ने पुरानी फोटो शेयर कर लिखा, “एक प्यार भरी याद… अलविदा, मेरी पहली को-स्टार।” अनुपम खेर ने ट्वीट किया, “हिंदी सिनेमा की नींव रहीं कामिनी जी।”

परिवार ने बताया कि अंतिम संस्कार आज शाम मुंबई में होगा, लेकिन मीडिया को दूर रहने की अपील की। एक करीबी ने कहा, “वे फरवरी में 99 की हो जातीं। परिवार को निजता चाहिए।”

कामिनी कौशल का जाना हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर का अंत है। उनकी सादगी, प्रतिभा और दृढ़ता लाखों को प्रेरित करती रहेगी। बॉलीवुड ने एक लीजेंड को खो दिया, लेकिन उनकी फिल्में अमर रहेंगी।

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