राजनीति

सीमांचल में ओवैसी का धमाका: तेजस्वी की सीटें छीनी, AIMIM 5-6 सीटों पर जीत की दहलीज पर

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सीमांचल का मुस्लिम वोटबैंक किसी एक पार्टी का गुलाम नहीं। असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने जहां महागठबंधन के चेहरे तेजस्वी यादव के MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण को करारा झटका दिया है, वहीं एनडीए को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा पहुंचाया है। शुरुआती रुझानों में AIMIM 5-6 सीटों पर मजबूत बढ़त बना रही है, जो 2020 के पांच सीटों वाले प्रदर्शन को दोहराने या उससे आगे निकलने का संकेत दे रही है।

चुनावी हलचल के बीच ओवैसी का पुराना तंज फिर याद आ रहा है। कुछ हफ्ते पहले एक इंटरव्यू में उन्होंने तेजस्वी पर चुटकी लेते हुए कहा था, “सीमांचल में अगर AIMIM पूरी ताकत से उतर गई, तो कोई जाकर रोएगा कि ‘हमसे चॉकलेट छीन ली गई’।” यह बयान सीधे तेजस्वी के लिए था, जो सीमांचल को RJD का ‘चॉकलेट’ (मजबूत गढ़) मानते थे। आज नतीजे बता रहे हैं कि ओवैसी का दांव काम कर गया। AIMIM के उम्मीदवार अमौर, कोचाधामन, बायसी, जोकीहाट, ठाकुरगंज और बहादुरगंज जैसी सीटों पर 8,000 से 14,000 वोटों की बढ़त बना रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, अमौर में अख्तरुल इमान 14,262 वोटों से आगे हैं, जबकि कोचाधामन में मोहम्मद सरावर आलम 13,996 वोटों की लीड ले रहे हैं।

सीमांचल में वोटों का ध्रुवीकरण: MY समीकरण टूटा, NDA को फायदा

सीमांचल की 24 सीटें (किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जिले) हमेशा से मुस्लिम-बहुल इलाका रही हैं, जहां बाढ़, गरीबी और प्रवासन जैसे मुद्दे वोट तय करते हैं। 2020 में AIMIM ने यहां पांच सीटें जीतकर RJD के वोटबैंक में सेंध लगाई थी, जिससे महागठबंधन को 10-12 सीटों का नुकसान हुआ। इस बार भी वही कहानी दोहराई जा रही है।

AIMIM की मजबूती: पार्टी ने 29 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिनमें से 24 सीमांचल में। रुझानों में AIMIM 5-6 सीटों पर आगे है, जो कांग्रेस (2-4 सीटें) से कहीं बेहतर है। ओवैसी ने प्रचार के दौरान तेजस्वी पर ‘एक्सट्रीमिस्ट’ (कट्टरपंथी) कहने का बदला लिया। उन्होंने रैलियों में कहा, “तेजस्वी आसमान में उड़ रहे हैं, जनता उन्हें जमीन पर उतारेगी।” AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने कहा, “हमने गठबंधन के लिए 6 सीटें मांगीं, लेकिन तेजस्वी ने इग्नोर किया। अब जनता ने फैसला सुना दिया।”

तेजस्वी को झटका: RJD के 143 सीटों वाले दांव के बावजूद पार्टी सिर्फ 24-28 सीटों पर सिमट रही है। तेजस्वी खुद राघोपुर से 4,000+ वोटों से पीछे हैं। सीमांचल में AIMIM ने मुस्लिम वोटों को बांट दिया, जिससे NDA 17-18 सीटों पर मजबूत हो गया। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी (JSP) ने भी 4-5 सीटों पर सेंध लगाई, लेकिन AIMIM का असर सबसे घातक साबित हुआ। एक विश्लेषक ने कहा, “ओवैसी ने ‘पतंग’ (AIMIM का चुनाव चिह्न) उड़ाकर MY की डोर काट दी।”

NDA की खुशी: BJP-JD(U) गठबंधन 199+ सीटों पर आगे है। सीमांचल में JDU के चार मुस्लिम उम्मीदवारों को फायदा मिला। नीतीश कुमार ने कहा, “विकास की लहर ने सबको बहा दिया।” BJP के सम्राट चौधरी तारापुर से 25,000+ वोटों से जीतते नजर आ रहे हैं।

ओवैसी की रणनीति: स्थानीय मुद्दों पर फोकस, गठबंधन से दूरी

AIMIM ने इस बार 25 उम्मीदवार उतारे, जिनमें दो गैर-मुस्लिम भी शामिल थे, ताकि वोटबैंक विस्तार हो। पार्टी ने अवैध प्रवासन, बाढ़ नियंत्रण और मुस्लिम आरक्षण जैसे मुद्दों पर जोर दिया। महागठबंधन में शामिल न होने का फैसला सही साबित हुआ, क्योंकि INDIA ब्लॉक में मुस्लिम उप-मुख्यमंत्री पद की मांग को नजरअंदाज किया गया था। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में AIMIM को ‘BJP की B-टीम’ कहा जा रहा है, जिसका ओवैसी ने खारिज किया: “हम न NDA के साथ हैं, न महागठबंधन के। हम मुसलमानों की आवाज हैं।”

वोटिंग के आंकड़े बताते हैं कि कुल 67.13% मतदान हुआ, जिसमें महिलाओं का रुझान NDA की ओर रहा। एक्जिट पोल्स ने AIMIM को 1-3 सीटें दी थीं, लेकिन रीयल टाइम ट्रेंड्स पार्टी को मजबूत दिखा रहे हैं। अगर अंतिम नतीजे ऐसे ही रहे, तो AIMIM बिहार में तीसरा खंभा बन सकती है।

तेजस्वी ने हार के संकेतों पर कहा, “परिवर्तन निश्चित है।” लेकिन सीमांचल से मिली ‘चॉकलेट’ की चोरी ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया है। बिहार की सियासत में ओवैसी का सूरज अब चमक रहा है—क्या यह स्थायी रहेगा, या फिर 2020 जैसी ‘शॉर्ट-लिव्ड’ जीत साबित होगी? नतीजों का इंतजार जारी है।

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