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अल फलाह यूनिवर्सिटी ने तोड़ी चुप्पी: आरोपी डॉक्टर्स से ‘केवल प्रोफेशनल लिंक’, निजी मामलों से कोई लेना-देना नहीं!

अल फलाह यूनिवर्सिटी ने तोड़ी चुप्पी: आरोपी डॉक्टर्स से ‘केवल प्रोफेशनल लिंक’, निजी मामलों से कोई लेना-देना नहीं!

दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट केस में फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी पर जांच एजेंसियों की नजरें टिक गई हैं। ‘सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल’ के नाम से चर्चित इस मामले में यूनिवर्सिटी के दो डॉक्टरों – डॉ. उमर मोहम्मद और डॉ. मुझम्मिल गनी – को गिरफ्तार किया गया है। इन पर ब्लास्ट की साजिश रचने, रेकी करने और जैश-ए-मोहम्मद से लिंक होने के आरोप हैं। गिरफ्तारियों के बाद सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर यूनिवर्सिटी की छवि पर सवाल उठे, तो अब संस्थान ने आधिकारिक बयान जारी कर सफाई दी है। कुलपति प्रो. (डॉ.) भूपिंदर कौर आनंद ने स्पष्ट कहा कि आरोपी डॉक्टर्स से यूनिवर्सिटी का केवल प्रोफेशनल संबंध है, निजी या आपराधिक गतिविधियों से कोई वास्ता नहीं।

बयान में कहा गया, “हम इस दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम से बेहद व्यथित हैं और इसकी कड़ी निंदा करते हैं। हमारी संवेदनाएं प्रभावित निर्दोष लोगों के साथ हैं।” आनंद ने आगे जोड़ा, “हमारे दो डॉक्टरों को जांच एजेंसियों ने हिरासत में लिया है, लेकिन उनकी आधिकारिक क्षमता के अलावा यूनिवर्सिटी का उनसे कोई और संबंध नहीं है। आरोपियों के निजी मामले से संस्थान का कोई लेना-देना नहीं।” यूनिवर्सिटी ने झूठी और भ्रामक खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स जानबूझकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। अल फलाह ग्रुप ने बताया कि वे 1997 से शैक्षणिक संस्थानों का संचालन कर रहे हैं, और यूनिवर्सिटी UGC मान्यता प्राप्त है। 2019 से शुरू मेडिकल कोर्स में 40% डॉक्टर्स कश्मीर से हैं, लेकिन कैंपस में कोई प्रतिबंधित सामग्री या गैरकानूनी गतिविधि नहीं होती – सभी लैब केवल ट्रेनिंग के लिए हैं।

यह बयान यूपी एटीएस और दिल्ली स्पेशल सेल की जांच के बीच आया है, जो मंगलवार को कैंपस में छापेमारी कर रही थी। सूत्रों के मुताबिक, जूनियर डॉक्टर्स सहित 6 लोगों को पूछताछ के लिए ले जाया गया। एक सहायक प्रोफेसर ने डॉ. शाहीन (एक अन्य आरोपी) के बारे में खुलासा किया कि वे अनुशासनहीन थीं और मनमानी करती थीं। जांच में सामने आया कि डॉ. गनी ने जनवरी में लाल किले की रेकी की थी, और 26 जनवरी पर बड़ा हमला प्लान था। यूनिवर्सिटी के 76 एकड़ कैंपस पर अब सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है।

राजनीतिक हलकों में यह मामला गरमा गया है। विपक्ष ने सरकार पर ‘सॉफ्ट टेररिज्म’ का आरोप लगाया, जबकि स्थानीय नेता यूनिवर्सिटी की सफाई को सशर्त स्वीकार कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह बयान जांच को प्रभावित नहीं करेगा, लेकिन संस्थान की प्रतिष्ठा पर असर पड़ेगा। अल फलाह ने सहयोग का भरोसा जताया है, लेकिन सवाल यह है – क्या यह प्रोफेशनल लिंक ही साजिश का हिस्सा था? जांच जारी है, और अगले अपडेट का इंतजार। क्या आपको लगता है कि यूनिवर्सिटी की सफाई पर्याप्त है? कमेंट्स में बताएं!

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