नोएडा निठारी सीरियल किलिंग केस: सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को अंतिम मामले में बरी किया, तत्काल रिहाई का आदेश
नोएडा निठारी सीरियल किलिंग केस: सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को अंतिम मामले में बरी किया, तत्काल रिहाई का आदेश
नई दिल्ली: नोएडा के निठारी सीरियल किलिंग केस से जुड़े अंतिम लंबित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की दोषसिद्धि रद्द कर दी और उसे तत्काल रिहाई का निर्देश दिया। यह फैसला 2005-06 के उन भयावह हत्याओं से जुड़ा है, जिन्होंने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। अब कोली को सभी 13 मामलों में बरी माना जाएगा, और वह लगभग 18 वर्षों बाद जेल से बाहर आ सकता है।
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने कोली की क्यूरेटिव पिटिशन (सुधारात्मक याचिका) को मंजूर करते हुए कहा, “याचिकाकर्ता को सभी आरोपों से बरी किया जाता है। यदि कोई अन्य केस न हो तो उसे तुरंत रिहा करें।” यह फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट के अक्टूबर 2023 के फैसले के बाद आया, जिसमें कोली को 12 मामलों में बरी किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2025 में सीबीआई और पीड़ित परिवारों की अपीलें खारिज कर दी थीं, लेकिन एक मामले में कोली की उम्रकैद बरकरार थी। अब यह अंतिम बाधा भी हट गई।
निठारी कांड की पृष्ठभूमि: भयावह हत्याओं का काला अध्याय
निठारी कांड 2005-06 में नोएडा के निठारी गांव में हुआ, जो दिल्ली से महज 20 किलोमीटर दूर है। 29 दिसंबर 2006 को निठारी के डी-5 सेक्टर में व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंधेर के घर के पीछे नाले से 8 बच्चों की हड्डियां बरामद हुईं। जांच में पता चला कि पंधेर के घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली ने कम से कम 16 बच्चों और महिलाओं का अपहरण, बलात्कार, हत्या और शवों को काटकर नाले में फेंकने का कृत्य किया। पीड़ित ज्यादातर गरीब परिवारों के बच्चे थे, जो पड़ोस में रहते थे। कोली ने कबूल किया कि वह शवों के टुकड़ों को खाता था और कैनिबलिज्म के आरोप लगे। पंधेर पर भी सहयोग का आरोप था।
सीबीआई ने 16 मामलों में चार्जशीट दाखिल की। ट्रायल कोर्ट ने 2010 में कोली को 10 मामलों में मौत की सजा सुनाई, जबकि पंधेर को एक मामले में दोषी ठहराया। लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2023 में कोली को 12 मामलों और पंधेर को 2 मामलों में बरी कर दिया, जांच में “गंभीर खामियां” बताते हुए। हाईकोर्ट ने कहा कि सबूत कमजोर थे, जबरन कबूलनामा लिया गया और चेन ऑफ एविडेंस टूटा। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2025 में अपीलें खारिज कर दीं, लेकिन एक मामले (15 वर्षीय लड़की की हत्या) में कोली की सजा बरकरार रखी।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: सबूतों की कमी, ‘न्याय का मजाक’
सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव पिटिशन पर सुनवाई करते हुए कहा कि एक मामले में दोषसिद्धि को बरकरार रखना “न्याय का मजाक” होगा, जब बाकी 12 मामलों में कोली बरी हो चुका है। बेंच ने नोट किया कि दोषसिद्धि मुख्य रूप से कोली के कबूलनामे और एक किचन चाकू की रिकवरी पर आधारित थी, जो अविश्वसनीय थी। जस्टिस नाथ ने कहा, “यह असामान्य स्थिति है। सबूतों की कमी और जांच की खामियों के कारण दोषसिद्धि रद्द।” कोर्ट ने सीबीआई की अपील को खारिज कर दिया, जो 2011 के फैसले को बरकरार रखना चाहती थी।
कोली को 2011 में मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन 2015 में हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदल दी। रिव्यू पिटिशन 2014 में खारिज हुई थी। अब क्यूरेटिव पिटिशन मंजूर होने से कोली को तुरंत रिहा करने का आदेश है, यदि कोई अन्य केस न हो। पंधेर पहले ही बरी हो चुका है।
प्रतिक्रियाएं: पीड़ित परिवारों का गुस्सा, सरकार की चुप्पी
पीड़ित परिवारों ने फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई। पायल नाम की पीड़िता की मां ने कहा, “यह न्यायिक सिस्टम की विफलता है। मेरी बेटी की हत्या का दोषी आज फ्री है।” सीबीआई और यूपी सरकार ने फैसले पर सवाल उठाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती का कोई रास्ता नहीं बचा। विपक्षी नेता कपिल सिब्बल ने कहा, “जांच की खामियां थीं, लेकिन न्याय मिलना चाहिए था।” BJP ने चुप्पी साधी है।
केस का प्रभाव: कानूनी सबक और सामाजिक बहस
निठारी कांड ने बच्चों की सुरक्षा और गरीबों के खिलाफ अपराधों पर बहस छेड़ी। 2024 में रिलीज हुई फिल्म ‘सेक्टर 36’ ने इसे फिर सुर्खियों में लाया। सुप्रीम कोर्ट का फैसला सबूतों की मजबूती पर जोर देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह जांच प्रक्रिया में सुधार की जरूरत बताता है। कोली की रिहाई पर सुरक्षा चिंताएं भी हैं।
यह फैसला निठारी के काले अध्याय को बंद करता है, लेकिन पीड़ितों के घाव गहरे हैं। न्याय की तलाश जारी रहेगी।
