जापान में भूकंपों की बौछार: 24 घंटे में सात झटके, 6.8 तीव्रता का सबसे घातक… सुनामी अलर्ट, तटीय इलाकों में हाई अलर्ट
जापान में भूकंपों की बौछार: 24 घंटे में सात झटके, 6.8 तीव्रता का सबसे घातक… सुनामी अलर्ट, तटीय इलाकों में हाई अलर्ट
जापान के पूर्वोत्तर तट पर शनिवार रात से भूकंपों का एक झुंड सक्रिय हो गया है, जिसने स्थानीय समयानुसार रविवार सुबह तक पूरे क्षेत्र को हिला दिया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार, सबसे बड़ा झटका 6.8 तीव्रता का था, जो इवाते प्रांत के पास प्रशांत महासागर में 10 किलोमीटर की गहराई पर केंद्रित था। यह भूकंप स्थानीय समयानुसार रविवार दोपहर करीब 5 बजे आया, जिसके बाद जापान मौसम विभाग (जेएमए) ने तुरंत सुनामी चेतावनी जारी कर दी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि तटीय इलाकों में 1 मीटर तक ऊंची लहरें पहुंच सकती हैं, हालांकि अभी तक कोई बड़ा नुकसान दर्ज नहीं किया गया है।
पिछले 24 घंटों में यह सातवां प्रमुख भूकंप था, जिसमें पांच अन्य झटके 5.0 से अधिक तीव्रता के थे। जेएमए के आंकड़ों के मुताबिक, ये भूकंप इवाते प्रांत के कुजी शहर के पास केंद्रित रहे, जहां इमारतें हिलीं और स्थानीय निवासियों को बाहर निकलने का आदेश दिया गया। भूकंप वैज्ञानिकों ने इसे ‘स्वार्म’ (झुंड) का रूप दिया है, जो अक्सर बड़े भूकंप की पूर्वसूचना हो सकता है। इवाते क्षेत्र, जो 2011 के विनाशकारी 9.0 तीव्रता वाले भूकंप से प्रभावित हो चुका है, पहले से ही उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में शुमार है। नानकाई ट्रफ के निकट यह गतिविधि चिंता बढ़ा रही है, जहां विशेषज्ञ 8-9 तीव्रता वाले ‘मेगा-क्वेक’ की आशंका जता चुके हैं।
सुनामी चेतावनी के तहत इवाते, मियागी और फुकुशिमा प्रांतों के तटीय इलाकों में सायरन बजाए गए। जेएमए ने अनुमान लगाया कि कुजी बे में अधिकतम 90 सेंटीमीटर ऊंची लहरें आ सकती हैं, जबकि उत्तर और दक्षिणी क्षेत्रों में समुद्र स्तर में मामूली वृद्धि संभव है। स्थानीय प्रशासन ने हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट्स में कोई मौत या गंभीर चोट की खबर नहीं है। ऊर्जा मंत्रालय ने बिजली लाइनों की जांच शुरू कर दी है, क्योंकि पिछले भूकंपों में नेटवर्क क्षति आम है।
यह घटना जापान की भूकंप-प्रवण भूगर्भीय स्थिति को रेखांकित करती है, जहां प्रति वर्ष औसतन 1,500 से अधिक झटके महसूस होते हैं। 1946 के नानकाई ट्रफ भूकंप में 1,300 से अधिक लोग मारे गए थे, और हाल के अनुमानों के अनुसार, यदि ऐसा ही कोई बड़ा झटका आया तो 2.98 लाख मौतें हो सकती हैं। सरकार ने नागरिकों से ‘भूकंप रेडी’ अभियान के तहत तैयारी की अपील की है, जिसमें घरों को मजबूत बनाना और आपातकालीन किट रखना शामिल है। अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियां निगरानी में हैं, जबकि जापानी सेना राहत कार्यों के लिए तैनात है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में और झटकों की संभावना जताई है, जिससे पूरे पूर्वोत्तर जापान में सतर्कता बरती जा रही है। यदि स्थिति बिगड़ी, तो यह राष्ट्रीय आपदा का रूप ले सकती है।
