कश्मीर में डॉक्टर के लॉकर से AK-47 बरामद: पूर्व सीनियर रेजिडेंट गिरफ्तार, UAPA के तहत जांच तेज
कश्मीर में डॉक्टर के लॉकर से AK-47 बरामद: पूर्व सीनियर रेजिडेंट गिरफ्तार, UAPA के तहत जांच तेज
कश्मीर घाटी में एक चौंकाने वाली घटना ने सुरक्षा एजेंसियों को हिलाकर रख दिया है। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) अनंतनाग के एक पूर्व सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर के व्यक्तिगत लॉकर से एक AK-47 राइफल बरामद हुई है। डॉक्टर की पहचान डा. आदिल अहमद राथर के रूप में हुई है, जो काजीगुंड के निवासी हैं। श्रीनगर पुलिस ने संयुक्त पूछताछ केंद्र (JIC) अनंतनाग की मदद से हथियार जब्त कर लिया है, और आरोपी को UAPA (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) के तहत हिरासत में ले लिया गया है। यह खुलासा आतंकी नेटवर्क की घुसपैठ को उजागर करता है, जहां मेडिकल कॉलेज जैसे संवेदनशील स्थानों का दुरुपयोग हो रहा है।
पुलिस के अनुसार, छापेमारी 7 नवंबर को दोपहर में हुई। डा. राथर 24 अक्टूबर 2024 तक GMC अनंतनाग में सीनियर रेजिडेंट के रूप में तैनात थे। लॉकर की तलाशी के दौरान AK-47 राइफल मिली, जो पूरी तरह कार्यशील स्थिति में थी। SSP अनंतनाग ने कहा, “यह एक बड़ी सफलता है। डॉक्टर आदिल और AK-47 अब श्रीनगर पुलिस के पास है। जांच जारी है, और हथियार की उत्पत्ति तथा आगे के लिंक ट्रैक किए जा रहे हैं।” फोरेंसिक टीम ने हथियार की जांच शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह कहां से आया और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था। प्रारंभिक पूछताछ में डॉक्टर ने चुप्पी साध रखी है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां संदेह कर रही हैं कि यह आतंकी संगठनों से जुड़ा हो सकता है।
यह घटना कश्मीर में स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर रही है। GMC अनंतनाग एक प्रमुख मेडिकल संस्थान है, जहां सैकड़ों डॉक्टर और स्टाफ काम करते हैं। एक पूर्व डॉक्टर का लॉकर में ऐसा खतरनाक हथियार मिलना न सिर्फ कॉलेज की सुरक्षा पर सवाल उठाता है, बल्कि पूरे क्षेत्र में छिपे खतरे को भी रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकी तत्व अब ‘सॉफ्ट टारगेट्स’ जैसे शैक्षिक संस्थानों का इस्तेमाल हथियार छिपाने के लिए कर रहे हैं। J&K पुलिस ने कहा कि यह रिकवरी इंटेलिजेंस आधारित थी, और आगे ऐसी कार्रवाइयां तेज होंगी।
विपक्ष ने सरकार से मांग की है कि मेडिकल कॉलेजों में सुरक्षा बढ़ाई जाए। फिलहाल, डा. राथर को श्रीनगर ले जाया गया है, जहां गहन पूछताछ हो रही है। कोई और हथियार या सहयोगी मिलने की संभावना से जांच एजेंसियां सतर्क हैं। यह मामला कश्मीर की शांति प्रक्रिया को नई चुनौती दे रहा है।
