शादी और मर्दानगी पर ‘शक्तिमान’ के बेबाक बोल: मुकेश खन्ना बोले- “ज्यादा अफेयर रखना मर्दानगी नहीं”
शादी और मर्दानगी पर ‘शक्तिमान’ के बेबाक बोल: मुकेश खन्ना बोले- “ज्यादा अफेयर रखना मर्दानगी नहीं”
मुंबई: छोटे पर्दे के ‘शक्तिमान’ और दिग्गज अभिनेता मुकेश खन्ना अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान 67 वर्षीय अभिनेता ने अपनी निजी जिंदगी, शादी और समाज में बदलते रिश्तों के प्रति नजरिए पर खुलकर बात की। मुकेश खन्ना ने उन धारणाओं को सिरे से खारिज कर दिया जो कहती हैं कि कई अफेयर होना ‘मर्दानगी’ की निशानी है।
”शादी कोई समझौता नहीं, किस्मत का खेल है”
मुकेश खन्ना आज भी सिंगल हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे विवाह की संस्था में विश्वास नहीं रखते। उन्होंने स्पष्ट किया:
पवित्र बंधन: उनके लिए शादी दो आत्माओं का मिलन है जो पिछले जन्मों के कर्मों और प्रारब्ध से तय होता है।
किस्मत का फैसला: अभिनेता का मानना है कि पत्नी किस्मत से मिलती है। वे कहते हैं, “शादी किस्मत में लिखी होती है, यह यूं ही नहीं हो जाती।”
उम्र की सीमा नहीं: उन्होंने जोर देकर कहा कि सही साथी मिलने के लिए उम्र कभी बाधा नहीं बनती।
अफेयर और मर्दानगी पर कड़ा प्रहार
इंटरव्यू के दौरान उन्होंने समाज की उस सोच पर सवाल उठाया जहाँ पुरुषों के कई अफेयर्स को उनकी ताकत या मर्दानगी से जोड़कर देखा जाता है।
”मर्दानगी साबित करने के लिए कई गर्लफ्रेंड बनाने की जरूरत नहीं है। इसे दिखाने के और भी कई गरिमापूर्ण तरीके हैं।”
उन्होंने अपने एक फिल्ममेकर दोस्त का उदाहरण देते हुए बताया कि वे कभी भी उस राह पर नहीं चले। मुकेश खन्ना के अनुसार, एक पुरुष को अपनी पत्नी के प्रति उतना ही वफादार होना चाहिए जितनी उम्मीद एक महिला से की जाती है। उन्होंने ‘पत्नीव्रता’ होने पर जोर देते हुए समाज के दोहरे मापदंडों की कड़ी आलोचना की।
आज के दौर का ‘मूव-ऑन’ कल्चर और प्यार
बदलते दौर में रिश्तों के टूटने पर चिंता व्यक्त करते हुए मुकेश खन्ना ने कहा:
सच्चा प्यार सिर्फ एक बार: उनके मुताबिक सच्चा प्यार बार-बार नहीं होता, बाकी सब केवल आकर्षण है।
वचन की कीमत: अगर कोई किसी को ‘आई लव यू’ कहकर आसानी से दूसरे साथी की ओर बढ़ जाता है, तो वह प्यार नहीं है।
गरिमा का सम्मान: वे महिलाओं के प्रति पूर्ण सम्मान रखने और रिश्तों में ईमानदारी बरतने की वकालत करते हैं।
निष्कर्ष: मुकेश खन्ना के इन विचारों ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। जहाँ कुछ लोग उनके पारंपरिक विचारों की सराहना कर रहे हैं, वहीं अन्य इसे आज के दौर में चुनौतीपूर्ण मान रहे हैं। लेकिन ‘भीष्म पितामह’ की तरह मुकेश अपने सिद्धांतों पर आज भी अडिग हैं।
