’विचारधारा की लड़ाई और काम करने का तरीका’: संदीप पाठक ने खोला AAP छोड़ने का राज, FIR पर भी दिया कड़ा जवाब
यह राजनीतिक गलियारों से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर है। आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख रणनीतिकार रहे संदीप पाठक ने अब भाजपा का दामन थामने के बाद अपनी चुप्पी तोड़ी है।
’विचारधारा की लड़ाई और काम करने का तरीका’: संदीप पाठक ने खोला AAP छोड़ने का राज, FIR पर भी दिया कड़ा जवाब
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी में मचे बड़े राजनीतिक भूचाल के बीच, पूर्व ‘आप’ सांसद संदीप पाठक ने भाजपा में शामिल होने के बाद पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है। राघव चड्ढा समेत 6 सांसदों के साथ पार्टी छोड़ने के फैसले ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। अब संदीप पाठक ने न केवल पार्टी छोड़ने के कारणों को स्पष्ट किया है, बल्कि पंजाब में अपने खिलाफ दर्ज हुई FIR पर भी खुलकर बात की है।
”अभी तक नहीं मिली FIR की कोई कॉपी”
राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने अपने खिलाफ हो रही कानूनी कार्रवाई पर हैरानी जताते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में केवल मीडिया के जरिए पता चला है। पाठक ने कहा:
”कल से टीवी चैनलों पर रिपोर्ट आ रही है कि पंजाब में मेरे खिलाफ दो FIR दर्ज की गई हैं। लेकिन हकीकत यह है कि मुझे अभी तक इन FIR के बारे में कोई भी औपचारिक या अनौपचारिक जानकारी नहीं दी गई है।”
उन्होंने आगे कहा कि वह FIR की कॉपी का इंतजार कर रहे हैं ताकि वह कानूनी तौर पर इसका जवाब दे सकें। उन्होंने आशंका जताई कि यह सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल भी हो सकता है।
AAP छोड़ने का असली कारण: निजी नहीं, सैद्धांतिक
संदीप पाठक ने उन कयासों पर विराम लगा दिया जिनमें कहा जा रहा था कि उन्होंने किसी निजी स्वार्थ के लिए पार्टी छोड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला विचारधारा की लड़ाई का परिणाम था। पाठक के अनुसार:
मतभेद: उन्होंने विचारधारा और काम करने के तरीके में लंबे समय से चल रहे मतभेदों के कारण पार्टी छोड़ी।
सिद्धांत: पाठक ने जोर देकर कहा कि उन्होंने हमेशा सिद्धांतों और नेकी के साथ काम किया है और आगे भी भाजपा में रहकर इसी ‘राजनीतिक धर्म’ का पालन करेंगे।
सफलता बनाम धर्म: उन्होंने कहा, “राजनीति में जीत या हार मायने नहीं रखती, मेरे लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि मैं अपने सिद्धांतों से समझौता न करूं।”
सियासी हलचल तेज
राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे कद्दावर नेताओं का भाजपा में जाना आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। संदीप पाठक ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी जांच से डरने वाले नहीं हैं और वे अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत पूरी स्पष्टता के साथ कर रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि आम आदमी पार्टी इन गंभीर आरोपों और बड़े नेताओं के पलायन पर क्या आधिकारिक रुख अपनाती है।
