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‘पाकिस्तान की पुरानी आदत’: ट्रंप के परमाणु टेस्ट दावे पर MEA का पहला बयान, AQ खान नेटवर्क का जिक्र

‘पाकिस्तान की पुरानी आदत’: ट्रंप के परमाणु टेस्ट दावे पर MEA का पहला बयान, AQ खान नेटवर्क का जिक्र

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पाकिस्तान पर ‘गुप्त परमाणु परीक्षण’ के दावे पर भारत सरकार ने पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इसे पाकिस्तान की ‘अवैध परमाणु गतिविधियों की पुरानी आदत’ बताते हुए ए.क्यू. खान नेटवर्क, तस्करी और प्रोलिफरेशन का हवाला दिया। MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “गुप्त और अवैध परमाणु गतिविधियां पाकिस्तान के इतिहास के अनुरूप हैं, जो दशकों से तस्करी, निर्यात नियंत्रण उल्लंघन, गुप्त साझेदारियों और आगे फैलाव पर केंद्रित रहा है। भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान पाकिस्तान के इन पहलुओं पर खींचा है। इस पृष्ठभूमि में, हम राष्ट्रपति ट्रंप के पाकिस्तान के परमाणु परीक्षण वाले बयान पर नजर रख रहे हैं।”

ट्रंप ने हाल ही में CBS न्यूज को दिए इंटरव्यू में दावा किया था कि पाकिस्तान, चीन, रूस और उत्तर कोरिया जैसी कई परमाणु शक्ति संपन्न देश गुप्त रूप से हथियार परीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने अमेरिका के 33 साल पुराने परीक्षण प्रतिबंध को समाप्त करने का औचित्य देते हुए कहा कि ये देश ‘चुपचाप परीक्षण कर रहे हैं, लेकिन प्रचार नहीं करते।’ MEA का यह बयान ट्रंप के दावे के चार दिन बाद आया, जो भारत-पाकिस्तान के मई 2025 के सैन्य टकराव (ऑपरेशन सिंदूर) के बाद के तनावपूर्ण संदर्भ में महत्वपूर्ण है। ट्रंप ने पहले भी दावा किया था कि उन्होंने व्यापार सौदों की धमकी देकर दोनों देशों के बीच ‘परमाणु युद्ध’ को रोका था।

ट्रंप की भारत यात्रा के सवाल पर जायसवाल ने कहा, “मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है। यदि कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध होती है, तो हम मीडिया को सूचित करेंगे।” MEA ने अफगानिस्तान के साथ संबंधों पर भी अपडेट दिया, जहां भारत ने काबुल में अपनी तकनीकी मिशन को पूर्ण दूतावास का दर्जा दिया है। जायसवाल ने कहा, “दोनों पक्षों के शीर्ष अधिकारियों के आदान-प्रदान के बाद यह कदम उठाया गया।”

पाकिस्तान ने ट्रंप के दावे को खारिज कर दिया है। इस्लामाबाद के एक अधिकारी ने कहा, “पाकिस्तान 1998 के चागई परीक्षणों के बाद कोई परीक्षण नहीं कर रहा। हम पहले परीक्षण करने वाले नहीं थे और न ही पहले फिर से शुरू करेंगे।” लेकिन भारत ने इसे पाकिस्तान की ‘परमाणु ब्लैकमेल’ की रणनीति का हिस्सा बताया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “यदि पाकिस्तान या अमेरिका परीक्षण कर रहे हैं, तो करें। हम सही समय पर सही कदम उठाएंगे।” SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के पास 2025 तक 170 परमाणु हथियार हैं, जो 2028 तक 200 तक पहुंच सकते हैं, जबकि भारत के पास 180 हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का बयान दक्षिण एशिया में परमाणु संतुलन को प्रभावित कर सकता है। पूर्व राजदूत ने कहा, “यह पाकिस्तान की प्रोलिफरेशन इतिहास को उजागर करता है, जहां AQ खान ने ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया को तकनीक बेची।” MEA का बयान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की चिंताओं को मजबूत करता है। फिलहाल, पाकिस्तान से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका है।

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